एक नए शोध में पाया गया कि उम्र के बारे में होने वाली चिंताएँ महिलाओं में एपिजेनेटिक उम्र बढ़ने की तेज़ दर से जुड़ी हो सकती हैं। यह काम Mariana Rodrigues के नेतृत्व में New York University की School of Global Public Health में हुआ और परिणाम पत्रिका Psychoneuroendocrinology में प्रकाशित हुए।
अध्ययन के लिए Midlife in the United States (MIDUS) अध्ययन के 726 महिलाओं के डेटा का उपयोग किया गया। प्रतिभागियों से तीन प्रकार की चिंताओं के बारे में पूछा गया: दिखने में कमी का भय, स्वास्थ्य समस्याएँ होने का डर, और प्रजनन क्षमता घटने की चिंता। रक्त के नमूनों से जैविक उम्र के दो एपिजेनेटिक माप—DunedinPACE (उम्र बढ़ने की गति) और GrimAge2 (累積 जैविक क्षति का अनुमान)—का मूल्यांकन किया गया।
मुख्य खोज यह थी कि उम्र बढ़ने से जुड़ी चिंता विशेषकर स्वास्थ्य बिगड़ने की चिंता DunedinPACE द्वारा मापी गई तेज़ उम्र बढ़ने से मजबूत रूप से जुड़ी थी। आकर्षण और प्रजनन से जुड़ी चिंताएँ एपिजेनेटिक मापों से महत्वपूर्ण रूप से जुड़ी नहीं पाईं। शोध ने यह भी दिखाया कि धूम्रपान और शराब जैसे स्वास्थ्य व्यवहार इस संबंध की व्याख्या कर सकते हैं।
कठिन शब्द
- एपिजेनेटिक — जीन के काम को बदलाने वाला जैविक संकेतएपिजेनेटिक मापों
- जैविक उम्र — शरीर में वास्तविक उम्र दिखाने वाला माप
- प्रजनन — संतान पैदा करने की शारीरिक क्षमताप्रजनन क्षमता
- स्वास्थ्य व्यवहार — स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाली आदतें
- माप — किसी चीज़ की मात्रा या स्तर नापने का तरीकामापों
- व्याख्या — किसी बात का अर्थ या कारण समझाना
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- क्या आपको लगता है कि उम्र के बारे में चिंताएँ लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं? अपने विचार बताइए।
- धूम्रपान और शराब जैसी आदतें उम्र बढ़ने को कैसे प्रभावित कर सकती हैं? उदाहरण दें।
- महिलाओं में उम्र के बारे में चिंताओं को कम करने के लिए कौन से व्यावहारिक कदम उठाए जा सकते हैं?