जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी की टीम ने यह निष्कर्ष प्रकाशित किया कि सामान्य संज्ञानात्मक स्क्रीनिंग परीक्षण, जैसे 30-बिंदु MMSE, पुरुषों और महिलाओं में मस्तिष्क बदलाव बराबर नहीं दिखाते। शोध विशेष रूप से MCI यानी माइल्ड कॉग्निटिव इम्पेयरमेंट के चरण पर ध्यान केंद्रित करता है और संकेत देता है कि महिलाओं का अच्छा MMSE स्कोर अंतर्निहित परिवर्तनों को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं कर सकता।
टीम ने कुल 332 लोगों के मस्तिष्क स्कैन का विश्लेषण कर लिंग और रोग चरण के अनुसार संरचनात्मक परिवर्तन तुलना किए। परिणामों से पता चला कि पुरुषों में सामान्य संज्ञानात्मक स्थिति से MCI तक आने पर पहले सिकुड़न दिखाई देता है, जबकि महिलाओं में MCI से अल्झाइमर तक अधिक तीव्र और व्यापक गिरावट रहती है।
अध्ययन ने यह भी दिखाया कि महिलाओं के संज्ञानात्मक परीक्षा स्कोर मस्तिष्क के अधिक क्षेत्रों से जुड़े थे। लेखक कहते हैं कि यह पैटर्न संकेत देता है कि महिला मस्तिष्क कार्य बनाए रखने के लिए अतिरिक्त क्षेत्रों का उपयोग कर सकता है, इसलिए सामान्य परीक्षण कुछ गिरावट छिपा सकते हैं। आगे के कदमों में रोगियों को समय के साथ ट्रैक करना और हार्मोन व आनुवंशिकी के प्रभावों का अध्ययन शामिल है।
कठिन शब्द
- संज्ञानात्मक — सोचने, याद रखने और समझने से संबंधितसंज्ञानात्मक परीक्षा
- स्क्रीनिंग — रोग या समस्या की शुरुआती जाँच प्रक्रियास्क्रीनिंग परीक्षण
- माइल्ड कॉग्निटिव इम्पेयरमेंट — हल्की सोच और स्मरण क्षमता में कमी की अवस्था
- सिकुड़न — अंग या ऊतकों का आकार कम होना
- व्यापक — किसी चीज़ का बड़ा हिस्सा या फैलाव
- आनुवंशिकी — अगली पीढ़ी में गुणों का पारित होना
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चर्चा के प्रश्न
- क्या आप सोचते हैं कि सामान्य स्क्रीनिंग परीक्षण महिलाओं में शुरुआती मस्तिष्क बदलाव छिपा सकते हैं? क्यों या क्यों नहीं?
- आप किन कारणों से समझते हैं कि महिला मस्तिष्क अतिरिक्त क्षेत्रों का उपयोग कर सकता है? अपने विचार में दो कारण बताइए।
- यदि आप इस अध्ययन के लेखक होते, तो अगले किस प्रकार के डेटा या परीक्षण जोड़ते ताकि लिंग के फर्क को और समझा जा सके?