ETH Zurich की प्रोफेसर Ursula Quitterer के नेतृत्व में की गई इस शोध का लेख पत्रिका Cell Reports Medicine में प्रकाशित हुआ। शोध लगभग 20 साल पहले तब शुरू हुआ जब Quitterer को काहिरा के Ain Shams University Hospital से मस्तिष्क ऊतक प्राप्त हुए, जिनमें डिमेंशिया वाले और बिना डिमेंशिया वाले मरीज शामिल थे।
टीम ने GRK2 नामक एंजाइम के दो रूप पाए: एक सामान्य सक्रिय रूप और एक निष्क्रिय रूप जो चयापचय से बनता है। डिमेंशिया वाले मस्तिष्क और अल्जाइमर माउस मॉडल में निष्क्रिय GRK2 अधिक मिला। यह निष्क्रिय रूप माइटोकोण्ड्रिया पर जमा होकर छिद्रों को बंद कर देता है, जिससे ऊर्जा घटती है और कोशिकीय तनाव बढ़ता है।
निष्क्रिय GRK2 अमाइलॉइड बीटा के उत्पादन को भी बढ़ाता है और इससे एक आत्म-स्थिर चक्र बनता है। टीम ने कई रासायनिक यौगिक बनाए और चूहों व कोशिका नमूनों पर आजमाया। एक यौगिक, जिसे Compound 10 कहा गया, ने GRK2 के जमाव को रोका, माइटोकोण्ड्रियल कार्य सुधारा और न्यूरॉन्स के जीवित रहने में मदद की।
शोधकर्ताओं ने पेटेंट के लिए आवेदन किया है और अब ETH Zurich यौगिक के आगे विकास के लिए किसी कंपनी की तलाश कर रहा है।
कठिन शब्द
- शोध — नई जानकारी पाने के लिए वैज्ञानिक काम
- मस्तिष्क ऊतक — मस्तिष्क का कोशिकाओं वाला भाग
- एंजाइम — शरीर में रसायन क्रिया तेज करने वाला प्रोटीन
- निष्क्रिय — कम या बिना गतिविधि वाला
- माइटोकोण्ड्रिया — कोशिका के अंदर ऊर्जा बनाने वाला अंगमाइटोकोण्ड्रियल
- जमाव — किसी चीज का एकत्रित होना या संचय
- अमाइलॉइड बीटा — मस्तिष्क में बनने वाला प्रोटीन जो जमा होता है
- पेटेंट — नई खोज पर कानूनी अधिकार का आवेदन
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चर्चा के प्रश्न
- यदि यह यौगिक मानवों में सफल हुआ तो अल्जाइमर के इलाज में किस तरह मदद मिल सकती है?
- आपके खयाल से शोधकर्ताओं को कंपनी क्यों चाहिए जो यौगिक का विकास करे?
- मस्तिष्क ऊतक से हुई खोजों को काहिरा जैसे अस्पतालों से प्राप्त नमूनों का क्या महत्व है?