जलकुम्भी झीलों और नदियों में रोशनी रोककर और मछली आबादी घटाकर पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाती है। Pooja Singh और उनके दो सहयोगियों ने इसी समस्या को संसाधन में बदलने का विचार रखा और जलकुम्भी को कच्चे माल बनाकर बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी पैड विकसित करने पर काम किया। Singh Symbiosis Centre for Waste Resource Management, Pune में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं और उनकी टीम ने पुणे के आसपास नदियों में जलकुम्भी के प्रसार पर ध्यान दिया।
उनकी परियोजना का उद्देश्य जल प्रदूषण और प्लास्टिक कचरे को कम करना, मासिक धर्म स्वच्छता में सुधार करना और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। Singh ने बताया कि पारंपरिक पैड में अक्सर सिंथेटिक पॉलिमर और प्लास्टिक परतें होती हैं जो बायोडिग्रेडेबल नहीं होतीं और इनमें हानिकारक यौगिक पाए जा सकते हैं।
Singh को Elsevier Foundation Chemistry for Climate Action Challenge में विजेता चुना गया और पुरस्कार Green and Sustainable Chemistry Conference, Pune (March 4-6) में घोषित किए गए। उनकी टीम Swachhatapukare Foundation के साथ काम कर रही है और परियोजना में कार्यशालाएँ और स्थानीय आय सृजन की योजनाएँ शामिल हैं।
कठिन शब्द
- जलकुम्भी — जल में बढ़ने वाली तैरती हुई वनस्पति
- पारिस्थितिकी — जीवों और उनके पर्यावरण की प्रणाली
- बायोडिग्रेडेबल — जैविक रूप से टूट कर खत्म हो जाने वाला
- मासिक धर्म — महिलाओं में मासिक चक्र से जुड़ी स्थिति
- प्लास्टिक कचरा — फेंके जाने वाले प्लास्टिक से बने अवशेषप्लास्टिक कचरे
- सशक्त — मजबूत या सक्षम बनाने की स्थिति
- प्रसार — किसी चीज का फैलना या बढ़ना
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चर्चा के प्रश्न
- क्या आप सोचते हैं कि जलकुम्भी से बने पैड ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने में मदद कर सकते हैं? क्यों?
- इस तरह की परियोजना से स्थानीय नदी-तालाबों के पारिस्थितिकी पर क्या असर पड़ सकता है?
- स्थानीय कार्यशालाएँ और आय सृजन योजनाएँ इस परियोजना में कैसे मदद कर सकती हैं?