नींद की कमी का व्यापक प्रभाव है और अब तक इसे शरीरद्रव्यों में सीधे और वस्तुनिष्ठ रूप से मापना कठिन था। University of Zurich के Institute of Forensic Medicine और Institute of Pharmacology and Toxicology के शोधकर्ताओं ने लार में नींद खोने के चयापचयी निशान खोजे और परखा कि क्या एकल लार नमूना तीव्र नींद अभाव का संकेत दे सकता है। Thomas Krämer ने इसे लार में नींद की कमी के पहले सीधे बायोमार्करों के रूप में वर्णित किया।
अध्ययन में बीस स्वस्थ युवा पुरुष शामिल थे, जिन्होंने यादृच्छिक क्रम में तीन प्रयोगात्मक अवस्थाएँ पूरी कीं: एक रात बिना नींद, चार लगातार रातें प्रत्येक छह घंटे की नींद, और नियंत्रण अवस्था में सामान्य आठ घंटे की नींद। शोधकर्ताओं ने लार का विश्लेषण उच्च‑रिज़ॉल्यूशन मास स्पेक्ट्रोमेट्री से किया और मशीन‑लर्निंग विधियों से दशकों हज़ार अणुओं में पैटर्न खोजे। पहले लेखक Michael Scholz के अनुसार तीव्र नींद अभाव लार में मौजूद लगभग 10% बायोमॉलिक्यों को प्रभावित करता है।
मुख्य चुनौती यह थी कि उन अणुओं में से किन्हें थकान के विश्वसनीय संकेतक कहा जा सके। अध्ययन ने दस बायोमार्करों की पहचान की और अब यह परियोजना एक बड़े अंतरराष्ट्रीय फील्ड अध्ययन में जाएगी। पहचाने गए बायोमार्करों का पेटेंट कर के वास्तविक जीवन की परिस्थितियों में मान्य किया जाएगा। शोधकर्ता यह परखेंगे कि क्या यह विधि शिफ्ट वर्क, शराब, दवाइयाँ और अन्य रोजमर्रा के कारकों के बीच भरोसेमंद ढंग से नींद की कमी का पता लगा सकती है।
दीर्घकाल में यह काम त्वरित ऑन‑साइट थकान परीक्षण विकसित करने की ओर ले जा सकता है, जो सड़क सुरक्षा और ऐसे कार्यस्थलों की सुरक्षा बढ़ा सकता है जहाँ ध्यान और एकाग्रता निर्णायक होते हैं। अध्ययन Journal of Proteome Research में प्रकाशित हुआ है; स्रोत: University of Zurich।
कठिन शब्द
- बायोमार्कर — शरीर की स्थिति दर्शाने वाला जैविक संकेतबायोमार्करों
- चयापचयी — शरीर में होने वाली रासायनिक प्रक्रियाओं से संबंधित
- मास स्पेक्ट्रोमेट्री — अणुओं की पहचान करने वाली विश्लेषण तकनीक
- मशीन‑लर्निंग — कम्प्यूटर से डेटा में पैटर्न सीखने की प्रक्रिया
- पेटेंट — कोई खोज कानूनी रूप से सुरक्षित करने की अनुमति
- अणु — किसी पदार्थ का सबसे छोटा रासायनिक हिस्साअणुओं
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चर्चा के प्रश्न
- लार‑आधारित थकान परीक्षण सड़क सुरक्षा पर कैसे प्रभाव डाल सकते हैं? कारण बताइए।
- बायोमार्करों का पेटेंट करने से वास्तविक जीवन में उपलब्धता और अनुसंधान पर क्या असर हो सकता है? अपने विचार दीजिए।
- ऐसे परीक्षण रोज़मर्रा की परिस्थितियों में लागू करने में किन चुनौतियों का सामना हो सकता है? उदाहरण दें।