वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन इन सेंट लुइस की टीम ने यह अध्ययन किया। समूह का नेतृत्व नरेशा सालीगरामा ने किया और सहयोगी संस्थानों में University of California, Irvine भी शामिल थे। परिणाम पत्रिका Immunity में प्रकाशित हुए हैं।
शोधकर्ताओं ने टॉन्सिल और रक्त से कुल 5.7 मिलियन टी कोशिकाओं की सिंगल-सेल सीक्वेंसिंग की। नमूने 10 स्वस्थ दाताओं से लिए गए जो टॉन्सिलेक्टॉमी करवा रहे थे, और उनकी उम्र शिशु से वयस्क तक थी। लेखकों के अनुसार यह अब तक के मानव टी कोशिकाओं के सबसे बड़े सिंगल-सेल डेटासेट में से एक है।
अध्ययन में कहा गया कि शरीर की कुल टी कोशिकाओं का 2% से भी कम भाग रक्त में पाया जाता है और अधिकांश कोशिकाएँ लिम्फैटिक अंगों या अन्य ऊतकों में रहती हैं। शोधकर्ता सुझाव देते हैं कि वैक्सीन और इम्यूनोथेरेपी का मूल्यांकन करते समय ऊतक स्थलों पर विचार करना चाहिए।
कठिन शब्द
- टी कोशिका — रोगों से लड़ने में मदद करने वाली प्रतिरक्षा इकाईटी कोशिकाओं
- सिंगल-सेल सीक्वेंसिंग — एक-एक कोशिका के जीन अनुक्रम को पढ़ने की विधि
- टॉन्सिलेक्टॉमी — गले की टॉन्सिल हटाने की शल्य क्रिया
- लिम्फैटिक अंग — रोग से लड़ने में मदद करने वाले ऊतक और ग्रंथियाँलिम्फैटिक अंगों
- इम्यूनोथेरेपी — रोगों के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करने वाला इलाज
- डेटासेट — विशेष अध्ययन के लिए एकत्रित सूचना का समूह
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चर्चा के प्रश्न
- क्या आप सोचते हैं कि वैक्सीन के प्रभाव का आकलन केवल रक्त के नमूने देखकर पर्याप्त होगा? क्यों या क्यों नहीं?
- इस अध्ययन में टॉन्सिल और रक्त के नमूने लिए गए थे। क्या भविष्य के अध्ययनों में अन्य ऊतकों का परीक्षण करने से फायदा होगा? संक्षेप में बताइए।
- बड़े सिंगल-सेल डेटासेट होने से वैक्सीन या इम्यूनोथेरेपी के विकास में क्या मदद मिल सकती है? अपने विचार लिखिए।