टीम ने 2017 से 2022 के बीच देशभर की 5,500 से अधिक कुशल नर्सिंग सुविधाओं में भर्ती हुए 500,000 से अधिक वयस्कों के Medicare क्लेम और इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड्स (EHR) का विश्लेषण किया। कुल 509,926 प्रतिभागियों में से केवल 8,843 को वैक्सीन दी गई।
शोध में recombinant शिंगल्स वैक्सीन (RZV/Shingrix) का कम से कम एक डोज़ लेने वाले लोगों की तुलना अनवैक्सिनेट लोगों से की गई। चार साल के फॉलो‑अप के बाद वैक्सीनेट समूह में 18.8% वयस्कों में डिमेंशिया विकसित हुआ, जबकि अनवैक्सिनेट समूह में यह दर 24.6% थी। कुल मिलाकर वैक्सीनेट समूह में चार वर्षों में डिमेंशिया निदान का जोखिम अनवैक्सिनेट समूह की तुलना में 24% कम था। लेखकों ने यह भी बताया कि यह अंतर अनुमानतः हर 17 में से 1 डिमेंशिया केस को रोकने के बराबर हो सकता है।
शोध ने लक्ष्य-नियोजित परीक्षण नकल (target trial emulation) विधि का उपयोग किया और परिणामों के सम्बन्ध में उम्र व स्वास्थ्य के भेदों के लिए समायोजन किया। हालांकि शोधकर्ता यह नहीं कह सकते कि वैक्सीन ने सीधे जोखिम घटाया है। पेपर Annals of Internal Medicine में प्रकाशित हुआ और टीम में कई विश्वविद्यालय और चिकित्सा केंद्र शामिल थे।
कठिन शब्द
- प्रतिभागी — किसी अध्ययन में हिस्सा लेने वाला व्यक्तिप्रतिभागियों
- डिमेंशिया — स्मृति और सोचने की क्षमता कम होना
- वैक्सीन — बीमारियों से बचाने के लिए दी जाने वाली दवा
- जोखिम — किसी नुकसान या बीमारी होने की संभावना
- फॉलो‑अप — किसी व्यक्ति की समय पर निगरानी
- समायोजन — अन्तर समझने के लिए आँकड़ों में बदलाव करना
- नर्सिंग सुविधा — बुजुर्गों के रहने और देखभाल की जगहनर्सिंग सुविधाओं
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चर्चा के प्रश्न
- यदि आपके परिवार में कोई बुजुर्ग हो, क्या आप शिंगल्स वैक्सीन लेने की सलाह देंगे? क्यों?
- आप क्यों सोचते हैं कि शोधकर्ता सीधे कारण-प्रभाव नहीं कह सकते। इसके क्या कारण हो सकते हैं?
- यह शोध सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों को कैसे प्रभावित कर सकता है? अपने विचार लिखिए।