हाल ही में 'कंप्यूटर्स इन ह्यूमन बिहेवियर' पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, जो कर्मचारी कार्यस्थल पर सोशल मीडिया पर लगातार नकारात्मक खबरें देखते हैं, उन्हें गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस शोध का नेतृत्व टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर इयान ह्यूजेस ने किया था। नकारात्मक खबरों को लगातार देखने की इस प्रवृत्ति को 'डूमस्क्रॉलिंग' कहा जाता है, जो दुनिया भर के युवाओं में तेजी से बढ़ रही है।
अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम के कामकाजी लोगों पर किए गए शोध में यह पाया गया कि जो कर्मचारी काम के दौरान ऐसी खबरें देखते हैं, वे लगातार उन्हीं नकारात्मक बातों के बारे में सोचते रहते हैं। इस मानसिक स्थिति के कारण उनका ध्यान काम से भटक जाता है। विशेष रूप से 'न्यूरोटिसिज्म' जैसे व्यक्तित्व गुणों वाले कर्मचारियों पर इसका प्रभाव बहुत अधिक गहरा होता है।
लोग अक्सर महामारी या युद्ध जैसे अनिश्चित हालातों को समझने के प्रयास में ऐसी सामग्री देखते हैं, लेकिन इससे तनाव और चिंता बढ़ती है। आधुनिक कार्यस्थलों पर स्मार्टफोन और लैपटॉप की आसान उपलब्धता के कारण ऐसा करना बहुत सरल हो गया है। हालांकि, शोधकर्ता कार्यस्थलों पर फोन या सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं हैं, क्योंकि ऐसे नियम आमतौर पर असफल होते हैं। इसके स्थान पर, कर्मचारियों को अपनी व्यक्तिगत सीमाएं निर्धारित करनी चाहिए और ऐसी खबरों को केवल काम के समय के अलावा ही देखना चाहिए।
कठिन शब्द
- अध्ययन — किसी विषय के बारे में की गई गहरी खोज या जांच
- प्रवृत्ति — किसी काम को बार-बार करने का स्वाभाविक स्वभाव या आदत
- मानसिक — मन या बुद्धि से जुड़ा हुआ विचार या स्थिति
- प्रतिबंध — किसी काम को करने पर पूरी तरह से रोक लगाना
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- कार्यस्थल पर सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग हमारे ध्यान और काम को कैसे प्रभावित करता है?
- नकारात्मक खबरों से बचने के लिए लोग अपने दैनिक जीवन में क्या उपाय कर सकते हैं?
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