नए शोध ने दिखाया कि मस्तिष्क के बड़े पैमाने के नेटवर्क एक छिपी हुई जैविक रूपरेखा पर बने होते हैं। शोधकर्ताओं ने fMRI स्कैन को आनुवंशिक डेटा और आणविक इमेजिंग से मिलाकर माइक्रोस्तरीय गुणों को बड़े नेटवर्क के साथ जोड़ा। इस काम का उद्देश्य यह समझना था कि सूक्ष्म जीवविज्ञान कैसे बड़े नेटवर्क को जन्म देता है।
टीम ने गतिशील कनेक्टिविटी को मापा, यानी मस्तिष्क क्षेत्र समय के साथ कैसे संवाद करते हैं। उन्होंने कोशिका मानचित्र, सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे रासायनिक संदेशवाहकों, तथा माइटोकॉन्ड्रिया जैसे ऊर्जा ढाँचों से संबंध खोजा। मध्यस्थता विश्लेषण से संकेत मिला कि नेटवर्क आणविक गुणों का संज्ञान पर प्रभाव दर्शाने में एक पुल बन सकते हैं।
Vince Calhoun वरिष्ठ लेखक हैं और वे Georgia State University, Georgia Tech और Emory University से जुड़े हैं। लीड लेखक Guozheng Feng TReNDS Center में पोस्टडॉक्टोरल रिसर्चर हैं और Jiayu Chen टीम के सदस्य हैं। शोध के परिणाम मानसिक और न्यूरोडीजेनेरेटिव विकारों के अध्ययन के तरीके बदलने का वादा रखते हैं।
कठिन शब्द
- जैविक — जीवों और कोशिकाओं से जुड़ी प्राकृतिक संरचना
- आनुवंशिक — अगली पीढ़ी में गुणों का स्थानांतरण
- माइक्रोस्तरीय — बहुत छोटे स्तर पर होने वाला
- गतिशील कनेक्टिविटी — समय के साथ मस्तिष्क क्षेत्रों का बदलता हुआ संपर्क
- संदेशवाहकों — शरीर में कोशिकाओं के बीच संकेत भेजने वाला रसायन
- माइटोकॉन्ड्रिया — कोशिका के अंदर ऊर्जा बनाने वाले अंग
- मध्यस्थता — दो बातों के बीच किसी प्रभाव का संबंध
- न्यूरोडीजेनेरेटिव — मस्तिष्क की कोशिकाओं का धीरे-धीरे नष्ट होना
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चर्चा के प्रश्न
- अगर बड़े नेटवर्क माइक्रोस्तरीय गुणों से जुड़े हैं, तो यह मानसिक रोगों के इलाज में कैसे मदद कर सकता है? कारण बताइए।
- आपको क्या लगता है कि कोशिका मानचित्र और रासायनिक संदेशवाहक की जानकारी क्लीनिकल परीक्षणों में कैसे उपयोग हो सकती है?
- इस शोध के आधार पर आप कैसे समझेंगे कि सामान्य दिमागी काम और बीमारी में क्या फर्क है? उदाहरण देकर बताइए।