वाशिंगटन यूनिवर्सिटी इन सेंट लुइस के राम दीक्षित के नेतृत्व में एक टीम ने जड़ों के मरोड़ के तंत्र की जांच की। टीम में पूर्व पीएचडी छात्र नताशा नोलन और इंजीनियर गैय जिनिन शामिल थे, तथा पेनसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के चार्ल्स एंडरसन सह-सीनियर लेखक थे। अध्ययन Nature Communications में प्रकाशित हुआ और यह CEMB के तहत आया।
शोध में एक मॉडल पौधा समाधान के रूप में लिया गया जहाँ जड़ें दायीं या बायीं ओर झुकती हैं। शोधकर्ताओं ने देखा कि जब सामान्य जैविक जीन आंतरिक कोशिका परतों में व्यक्त हुआ तो मरोड़ बना रहा, जबकि वही जीन केवल एपिडर्मिस में व्यक्त होने पर जड़ की वृद्धि सीधी हुई।
यांत्रिक जीवविज्ञान प्रयोगों ने सेलूलोज़ माइक्रोफाइब्रिल्स की दिशा में बदलाव मापा, और कंप्यूटर मॉडल ने दिखाया कि बाहरी परत का लीवरेज अधिक होने के कारण वह पूरे अंग के मरोड़ को नियंत्रित कर सकती है। लेखक बताते हैं कि यह समझ जड़ संरचना इंजीनियरिंग के लिए उपयोगी लक्ष्य प्रदान करती है।
कठिन शब्द
- मरोड़ — किसी अंग का घुमाव या मोड़ आने की क्रिया
- एपिडर्मिस — पौधे की बाहरी कोशिकाओं की एक परत
- व्यक्त होना — किसी गुण या अभिव्यक्ति का सामने आनाव्यक्त हुआ, व्यक्त होने पर
- सेलूलोज़ माइक्रोफाइब्रिल्स — कोशिका की दीवार में पाए जाने वाले छोटे रेशे
- लीवरेज — किसी हिस्से का अपेक्षाकृत अधिक प्रभाव या ताकत
- मॉडल पौधा — अनुसंधान में प्रयोग के लिए छोटा प्रतिनिधि पौधा
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चर्चा के प्रश्न
- इस अध्ययन में पाया गया कि जीन किस परत में व्यक्त होने से जड़ सीधी रहती है? अपने शब्दों में समझाइए।
- बाहरी परत के अधिक लीवरेज होने का अर्थ क्या है और यह जड़ों की दिशा बदलने में कैसे मदद कर सकता है?
- यदि आप पौधों की जड़ संरचना बदलना चाहें, तो इस शोध की कौन सी खोज सबसे उपयोगी लगेगी और क्यों?