एक बहु-स्थानीय टीम ने समझाया है कि क्यों पौराणिक रूप से रिचार्ज होने वाली बैटरियाँ समय के साथ प्रदर्शन खो देती हैं। हर चार्ज और डिस्चार्ज चक्र पर सेल फैलता और सिकुड़ता है; इस नियमित बदलाव को शोधकर्ता "साँस लेना" कहते हैं।
इस आवृत्ति से इलेक्ट्रोड के कणों में सूक्ष्म आकार परिवर्तन और स्थानीय तनाव बनता है। कणों की गतिशीलता एक समान नहीं होती; कुछ तेज़ी से खिसकते हैं जबकि अन्य स्थिर रहते हैं। इस असमानता से "स्ट्रेन कासकेड्स" बनते हैं, जो समय के साथ दरारें और अन्य क्षति पैदा कर सकते हैं।
टीम ने ऑपेरांडो X-रे इमेजिंग और 3D एक्स-रे लैमिनोग्राफी से इन प्रभावों को रीयल-टाइम में देखा। अध्ययन Science में प्रकाशित हुआ और सुझाव देता है कि इलेक्ट्रोड के डिजाइन में बदलाव या नियंत्रित दबाव क्षरण कम कर सकते हैं।
कठिन शब्द
- इलेक्ट्रोड — बैटरी का वह हिस्सा जो विद्युत प्रतिक्रिया करता हैइलेक्ट्रोड के
- कण — किसी पदार्थ का बहुत छोटा ठोस या दाने जैसा भागकणों
- तनाव — किसी वस्तु में दबाव या खिंचाव से बना बल
- गतिशीलता — किसी कण या हिस्से का स्थान बदलने की क्षमता
- असमानता — समान व्यवहार न होना; भिन्नता या अंतर
- साँस लेना — बार-बार फैलना और सिकुड़ना जैसा नियमित परिवर्तन
- क्षरण — धीरे-धीरे टूटना या काम करने की क्षमता कम होना
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- आप रोज़मर्रा के उपकरणों में बैटरी जीवन बढ़ाने के लिए क्या कर सकते हैं? दो‑तीन वाक्य में बताइए।
- इलेक्ट्रोड के डिजाइन बदलने से क्या फायदे और कठिनाइयाँ हो सकती हैं? छोटा जवाब दीजिए।
- क्या नई इमेजिंग तकनीकें बैटरियों के बेहतर डिजाइन में मदद कर सकती हैं? अपने विचार और कारण लिखिए।