टेक्सास विश्वविद्यालय, Northeastern University, Stanford University और Argonne National Laboratory के शोधकर्ताओं ने देखा कि रिचार्जेबल बैटरियाँ चार्ज और डिस्चार्ज के दौरान फैलती और सिकुड़ती हैं। शोध में इस प्रभाव को "साँस लेना" कहा गया है।
हर चक्र से इलेक्ट्रोड के कणों में सूक्ष्म आकार बदलते हैं और तनाव बनता है। शोधकर्ता इस प्रक्रिया को रासायनिक-यांत्रिक क्षरण कहते हैं और इसे "स्ट्रेन कासकेड्स" के रूप में वर्णित करते हैं।
टीम ने रीयल-टाइम X-रे इमेजिंग और 3D एक्स-रे लैमिनोग्राफी से इन प्रभावों को देखा। अध्ययन ने सुझाया कि बेहतर इलेक्ट्रोड डिजाइन और नियंत्रित दबाव से क्षति कम की जा सकती है।
कठिन शब्द
- इलेक्ट्रोड — बैटरी का वह हिस्सा जहाँ रासायन मिलते हैं
- सूक्ष्म — बहुत छोटा, आंख से मुश्किल दिखने वाला
- तनाव — बाहरी या अंदरूनी होने वाला दबाव
- क्षरण — धीरे-धीरे होने वाला टूटना या नुकसानरासायनिक-यांत्रिक क्षरण
- लैमिनोग्राफी — त्रि-आयामी एक्स-रे तस्वीर लेने की विधि
- रीयल-टाइम — तुरंत और सीधे ही जानकारी दिखाने वाली प्रक्रिया
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चर्चा के प्रश्न
- क्या आपने कभी किसी डिवाइस में बैटरी का सूजना देखा है? बताइए।
- आप क्यों सोचते हैं कि नियंत्रित दबाव बैटरी के लिए मददगार होगा?
- घर में बैटरियों की सुरक्षा के लिए आप कौन से सरल कदम लेंगे?
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