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स्तर A2 – प्राथमिक / एलिमेंटरीCEFR A2
2 मिनट
118 शब्द
एक नया अध्ययन दिखाता है कि सिगरेट का धुआँ आँख की कोशिकाओं में बदलाव कर सकता है और उम्र‑संबंधी मैक्यूलर डिजेनेरेशन (AMD) का जोखिम बढ़ा सकता है। शोध में कहा गया है कि धुएँ से कोशिकाओं में एपिजेनेटिक परिवर्तन होते हैं जो जीन की अभिव्यक्ति बदल देते हैं।
शोध में चूहों पर तीव्र और दीर्घकालिक धुएँ के संपर्क के प्रयोग किए गए और मानव दाता RPE कोशिकाओं का भी परीक्षण हुआ। वैज्ञानिकों ने 3, 6 और 10 दिनों के बाद और रोजाना चार महीने के बाद कोशिकाएँ जाँचीं।
परिणामों से पता चला कि क्रोमैटिन पहुँच घटती है और सामान्य RPE कार्य जीनों की अभिव्यक्ति कम हो जाती है, जो उम्र बढ़ने के संकेतों जैसी विशेषताएँ दर्शाती हैं।
कठिन शब्द
- एपिजेनेटिक — डीएनए बदलें बिना जीनों को प्रभावित करने वाले बदलाव
- अभिव्यक्ति — जीन से प्रोटीन बनने या सक्रिय होने की क्रिया
- क्रोमैटिन पहुँच — डीएनए और उससे जुड़े प्रोटीन की खुली या बंद स्थिति
- दीर्घकालिक — एक लंबे समय की अवधि के लिए होने वाला
- जोखिम — किसी नुकसान या बीमारी के होने का संभावित खतरा
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- क्या आप सोचते हैं कि धूम्रपान आँखों की बीमारी का कारण बन सकता है? क्यों?
- क्या आपने कभी धुएँ वाले कमरे में लंबे समय तक रहकर आँखों में लक्षण महसूस किए हैं? बताइए।