नए अध्ययन के अनुसार सिगरेट धुआँ रेटिनल पिग्मेंटेड एपिथेलियल (RPE) कोशिकाओं में एपिजेनेटिक और क्रोमैटिन बदलाव कर सकता है, जो आँख के उम्र‑संबंधी परिवर्तन और AMD के विकास से जुड़े दिखते हैं। यह शोध Proceedings of the National Academy of Sciences में प्रकाशित हुआ।
शोधकर्ता 3‑month और 12‑month उम्र के चूहों पर तीव्र (acute) और दीर्घकालिक (chronic) धुएँ के संपर्क की तुलना कर रहे हैं; ये मूसा आयु‑समूह मानवों में युवा वयस्क और देर मध्य‑वयस्कता से तुल्य रखे गए हैं। उन्होंने 3, 6 और 10 दिनों के इंजेक्शन और रोज़ाना चार महीने के संपर्क के बाद RPE कोशिकाएँ जाँचीं और क्रोमैटिन पहुँच मापी।
तीव्र संपर्क ने ऐसे खराब RPE क्लस्टर बनाए जिनमें मूल RPE जीनों की अभिव्यक्ति घट गई और उम्र‑के हॉलमार्क्स जैसे जीनोमिक अस्थिरता, telomere सिकुड़ना और माइटोकॉन्ड्रिया का विकार दिखा। मानव दाता RPE प्रयोगों में शोध ने उन जीनों की पहचान की जिनका अभिव्यक्ति पैटर्न चूहों से मेल खाता है और ये AMD के विकास से जुड़े हो सकते हैं।
कठिन शब्द
- एपिजेनेटिक — जीन के बाहर होने वाले नियंत्रक रासायनिक बदलाव
- क्रोमैटिन — अनुवांशिक सामग्री और प्रोटीन का संयोजन
- अभिव्यक्ति — जीनों से प्रोटीन या रासायन बनने की प्रक्रिया
- जीनोमिक अस्थिरता — जीनों के अनुक्रम में अनियमित परिवर्तन
- माइटोकॉन्ड्रिया — कोशिका के ऊर्जा बनाने वाले अंग
- दीर्घकालिक — लंबे समय तक जारी रहने वाला स्थिति या प्रभाव
- कोशिका — जीवों की सबसे छोटी जीवन ईकाईकोशिकाएँ
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चर्चा के प्रश्न
- आप क्यों सोचते हैं कि धुएँ से होने वाले एपिजेनेटिक बदलाव आँखों की उम्र‑संबंधी समस्याओं में योगदान दे सकते हैं? उदाहरण दें।
- अगर धूम्रपान RPE कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है तो स्वास्थ्य नीतियों में क्या परिवर्तन सहायक हो सकते हैं? अपने विचार संक्षेप में लिखें।