नवीन शोध से पता चलता है कि अमेरिका में क्रॉनिक किडनी रोग (CKD) का प्रसार बढ़ रहा है और लगभग 36 मिलियन वयस्क इससे प्रभावित हैं। शोधकर्ता चेतावनी देते हैं कि कई मामले शुरुआत में अनदेखे रहते हैं; Alejandro Chade कहते हैं कि दस में से नौ वयस्कों को बीमारी का पता नहीं होता। untreated रहने पर CKD डायलिसिस या प्रत्यारोपण तक पहुँच सकता है।
CKD में गुर्दों के ऊतकों को नुकसान होता है और उनकी कुल कचरा-निकासी क्षमता घटती है। शोध में छोटे रक्त वाहिकाओं का क्षय, सूजन और फाइब्रोसिस जैसे लक्षण बताए गए हैं। फाइब्रोसिस का अर्थ है दागी ऊतक का बढ़ना जो सामान्य गुर्दे की कार्यशील कोशिकाओं की जगह ले लेता है।
Alejandro Chade के नेतृत्व वाली टीम ने रोगग्रस्त गुर्दों में प्रोटीन और कोशिकाओं के बीच अंतःक्रियाएँ समझने के लिए पशु मॉडल का उपयोग किया। उनका लक्ष्य उन जीनों और आणविक मार्गों की पहचान करना था जो रोग की प्रक्रिया में भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कई जीन पहचाने जो संभावित उपचार लक्ष्यों के रूप में काम कर सकते हैं और एक जीन को शांत करने पर मॉडल में फाइब्रोटिक गतिविधि कम हुई।
टीम अब इन जीनों का विस्तृत अध्ययन करना चाहती है ताकि यह मानचित्रित किया जा सके कि वे शरीर के किन अन्य हिस्सों में सक्रिय हैं और जब उनकी गतिविधि मापी या मॉडरेट की जाती है तो क्या प्रतिक्रिया होती है। शोधकर्ता कहते हैं कि किसी भी चिकित्सा को मरीजों तक लाने से पहले अन्य ऊतकों में अनपेक्षित प्रभावों की सावधानीपूर्वक जाँच आवश्यक है। यदि भविष्य के कार्य जीन गतिविधि बदलने के सुरक्षित और प्रभावी तरीके साबित करते हैं, तो नई उपचार विधियाँ CKD की प्रगति को धीमा कर सकती हैं, जिससे डायलिसिस और प्रत्यारोपण टाले जा सकते हैं और रोगियों की दीर्घकालिक सेहत व जीवन गुणवत्ता संरक्षित रह सकती है। यह शोध Kidney360 में प्रकाशित हुआ है और सहलेखक Mizzou तथा Mayo Clinic से हैं।
कठिन शब्द
- क्रॉनिक किडनी रोग — गुर्दे की धीरे-धीरे बिगड़ने वाली हालत
- प्रसार — किसी स्थिति या बीमारी का फैलना
- अनदेखे — जो शुरू में पता न लगे
- फाइब्रोसिस — दागी ऊतकों का बढ़ना और कठोर होना
- फाइब्रोटिक — दागी ऊतक वाली गतिविधि या प्रक्रिया
- जीन — डीएनए का वह हिस्सा जो गुण तय करता हैजीनों
- शांत करना — किसी जीन की गतिविधि को कम करनाशांत करने
- प्रत्यारोपण — किसी अंग को दूसरे व्यक्ति से लगाना
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चर्चा के प्रश्न
- शोधकर्ता क्यों कहते हैं कि किसी भी चिकित्सा को मरीजों तक लाने से पहले अन्य ऊतकों में अनपेक्षित प्रभावों की जाँच जरूरी है? अपने शब्दों में बताइए।
- यदि जीन गतिविधि बदलने के सुरक्षित और प्रभावी तरीके मिल जाएँ, तो यह CKD के मरीजों के जीवन और देखभाल पर क्या प्रभाव डाल सकता है? उदाहरण डालकर समझाइए।
- टीम अब जीनों का विस्तृत अध्ययन करना चाहती है ताकि उनकी सक्रियता और प्रतिक्रिया समझी जा सके — आप सोचते हैं इस अगले चरण में किन प्रमुख सवालों का जवाब मिलना चाहिए?