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स्तर A2 – प्राथमिक / एलिमेंटरीCEFR A2
2 मिनट
98 शब्द
मिशूरी विश्वविद्यालय की एक टीम ने सुझाव दिया कि मुर्गियाँ अपने अंडों में लगातार उपयोगी चिकित्सा प्रोटीन बना सकती हैं। यह प्रोटीन इंसानों की रक्षा में काम आ सकते हैं।
शोध में उन्होंने एपिजेनेटिक साइलेंसिंग नामक समस्या बताई। जब नया जीन यादृच्छिक जगह पर डाला जाता है, तो वह समय के साथ बंद हो सकता है। टीम ने CRISPR का उपयोग कर नया जीन GAPDH नाम के एक विशेष स्थान पर रखा और एक हरा चमकने वाला मार्कर जोड़ा। महीनों और कई कोशिका विभाजनों के बाद वह मार्कर चमकता रहा, जो जीन के सक्रिय रहने का संकेत था।
कठिन शब्द
- एपिजेनेटिक साइलेंसिंग — जीन समय के साथ बंद हो जाना
- यादृच्छिक — कोई निश्चित क्रम या नियम न होना
- मार्कर — कोई संकेत या दिखने वाला चिन्ह
- कोशिका विभाजन — एक कोशिका का दो भागों में बननाकोशिका विभाजनों
- प्रोटीन — शरीर में काम करने वाला बड़ा अणु
- सक्रिय — काम कर रहा या चालू होना
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- क्या आप सोचते हैं कि मुर्गियों के अंडों में दवा बनाने का तरीका अच्छा विचार है? क्यों?
- अगर नया जीन यादृच्छिक जगह पर डाला जाए तो आपको कौन-सी समस्या लगती है?
- हरा चमकने वाला मार्कर जोड़ने का क्या फायदा था, आप कैसे समझते हैं?