The Astrophysical Journal Letters में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया गया है कि जब कोई तारा बहुत पास आता है तो कृष्ण विवर उसका पदार्थ लंबी, पतली मलबा धारा में खींच देता है। समय के साथ यह धारा कृष्ण विवर के चारों ओर लपेटती है और कुछ हिस्से आपस में टकरा सकते हैं।
इन टकरावों से अचानक ऊर्जा का उत्सर्जन होता है और बाद में पदार्थ धीरे-धीरे कृष्ण विवर में गिरता है — इसे accretion कहते हैं। इस तरह के फ्लेयर्स बहुत तेज रोशनी पैदा करते हैं और कभी-कभी अपने होस्ट आकाशगंगा से भी अधिक चमकदार होते हैं (लगभग 1 trillion Suns)।
शोधकर्ता कंप्यूटर सिमुलेशन का उपयोग कर रहे हैं। Lucio Mayer और उनकी टीम ने smoothed particle hydrodynamics और Navier-Stokes समीकरणों से नियंत्रित मॉडलों में बहुत बड़े कणों के सेट का प्रयोग किया और शक्तिशाली GPUs से सिमुलेशन चलाये। इन परिणामों से TDEs की विविध लाइट कर्व्स समझने में मदद मिलती है।
कठिन शब्द
- कृष्ण विवर — इतना घना अंतरिक्षीय पिंड जो प्रकाश रोकता है
- मलबा धारा — तारे के टूटे हुए हिस्सों का पतला लंबा समूह
- टकराव — दो चीजों का आपस में जोर से भिड़नाटकरावों
- उत्सर्जन — ऊर्जा या विकिरण का बाहर निकलना
- सिमुलेशन — किसी घटना को कंप्यूटर पर नकली रूप से चलाना
- आकाशगंगा — तारों और गैसों का बड़ा अंतरिक्षीय समूह
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- कंप्यूटर सिमुलेशन असली अंतरिक्ष घटनाओं को समझने में कैसे मदद कर सकते हैं? दो कारण लिखिए।
- यदि कोई फ्लेयर आपकी आकाशगंगा से भी ज़्यादा चमकदार दिखे, तो वैज्ञानिक और जनता किन तरह की जानकारी या चिंता कर सकते हैं? एक-दो वाक्य में बताइए।
- इन टकरावों और उत्सर्जन को देखकर आपको क्या लगता है—ऑब्जर्वेशन और सिमुलेशन में कौन ज्यादा महत्वपूर्ण है? अपने विचार बताइए।