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#अंतरिक्ष6

टाइटन: एकल महासागर नहीं, चिपचिपी परत का संकेत — स्तर B2 — a close up of a rock with small holes in it
18 दिस॰ 2025

टाइटन: एकल महासागर नहीं, चिपचिपी परत का संकेत

कैसिनी डेटा के नए विश्लेषण से पता चलता है कि शनि के चंद्रमा टाइटन के अंदर एक गहरे वैश्विक महासागर की बजाय एक मोटी चिपचिपी परत और पिघलन-जेब हो सकती हैं। यह खोज रहने योग्य वातावरण के विचार बदल सकती है।

फोटो: Shaifulnizam Harun, Unsplash

हर आकाशगंगा के केंद्र में विशाल कृष्ण विवर नहीं होते — स्तर B2 — an artist's impression of a black hole in the sky
15 दिस॰ 2025

हर आकाशगंगा के केंद्र में विशाल कृष्ण विवर नहीं होते

मिशिगन विश्वविद्यालय के नेतृत्व में Chandra के डेटा से 1,600 से अधिक आकाशगंगाओं के अध्ययन में पाया गया कि बड़े आकाशगंगाओं में अधिकतर कृष्ण विवर हैं, पर बौनी आकाशगंगाओं में केवल लगभग 30% में ही वे दिखाई देते हैं।

नोवा विस्फोटों की सीधे तस्वीरें — स्तर B2 — a bright blue and red star surrounded by stars
6 दिस॰ 2025

नोवा विस्फोटों की सीधे तस्वीरें

वैज्ञानिकों ने विस्फोट के कुछ ही दिनों में दो नोवा की सीधे तस्वीरें लीं। तस्वीरों से पता चला कि पदार्थ कई अलग प्रवाहों में निकला और यह उच्च-ऊर्जा गामा किरणों से जुड़ा था।

नया अध्ययन: 'मिनी नेप्च्यून' ग्रहों पर ठोस सतह संभव — स्तर B2 — an artist's rendering of a star and a planet
2 दिस॰ 2025

नया अध्ययन: 'मिनी नेप्च्यून' ग्रहों पर ठोस सतह संभव

यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो की टीम ने मिनी नेप्च्यून ग्रहों की सतहों का पुन: परीक्षण किया। James Webb के डेटा से पता चला कि भारी वायुमंडल सतह पर दबाव बढ़ाकर पिघला चट्टान ठोस कर सकता है।

बाह्यग्रह पर जीवन: बायोसिग्नेचर और टेक्नोसिग्नेचर — स्तर B2 — an artist's rendering of a planet and a star
1 दिस॰ 2025

बाह्यग्रह पर जीवन: बायोसिग्नेचर और टेक्नोसिग्नेचर

1995 की खोज के बाद से शोधकर्ताओं ने 4,000 से अधिक बाह्यग्रह पाए। अब वैज्ञानिक जीवन के रासायनिक निशान (बायोसिग्नेचर) और तकनीकी निशान (टेक्नोसिग्नेचर) दोनों की तलाश कर रहे हैं।

भारत ने सूर्य का नया जांच यान भेजा — स्तर B2 — flag hanging on pole
5 सित॰ 2023

भारत ने सूर्य का नया जांच यान भेजा

चंद्र मिशन के कुछ दिन बाद भारत ने Aditya-L1 नाम का सौर जांच यान 2 सितंबर को भेजा। वैज्ञानिकों ने तकनीकी सफलता की प्रशंसा की, पर कुछ ने सार्वजनिक विज्ञान वित्तपोषण पर सवाल उठाए।

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