LingVo.club
📖+40 XP
🎧+25 XP
+45 XP
हर आकाशगंगा के केंद्र में विशाल कृष्ण विवर नहीं होते (स्तर B2) — an artist's impression of a black hole in the sky

हर आकाशगंगा के केंद्र में विशाल कृष्ण विवर नहीं होतेCEFR B2

15 दिस॰ 2025

स्तर B2 – ऊपरी-मध्य स्तर
6 मिनट
301 शब्द

मिशिगन विश्वविद्यालय की अगुवाई में एक शोध टीम ने NASA के Chandra X-ray Observatory के बीस साल से अधिक के अवलोकन और एक दर्जन से अधिक संस्थानों के सहयोग से 1,600 से अधिक आकाशगंगाओं का विस्तृत विश्लेषण किया। नमूना आकार में व्यापक था: कुछ आकाशगंगाएँ मिल्की वे के द्रव्यमान के लगभग 10 गुना तक बड़ी थीं, जबकि कुछ बौनी आकाशगंगाएँ हमारे घर आकाशगंगा के कुछ प्रतिशत द्रव्यमान पर थीं। यह शोध The Astrophysical Journal में प्रकाशित हुआ।

परिणाम बताते हैं कि केवल लगभग 30% बौनी आकाशगंगाओं में संभावित अल्ट्रा-द्रव्यमान कृष्ण विवर मौजूद हैं, जबकि बड़े आकाशगंगाओं में यह अनुपात 90% से अधिक है। कई बड़ी आकाशगंगाओं के केंद्रों में चमकीले X-रे स्रोत देखे गए, जो बताता है कि गिरता हुआ पदार्थ गर्म होकर X-रे उत्सर्जित कर रहा है। छोटी आकाशगंगाएँ, जिनका द्रव्यमान 3 अरब सूर्य से कम है, आमतौर पर ये स्पष्ट X-रे संकेत नहीं दिखातीं; तुलना के लिए मिल्की वे का द्रव्यमान लगभग 60 अरब सूर्य के बराबर बताया गया है।

टीम ने दो व्याख्याएँ परखी: या तो कम-द्रव्यमान आकाशगंगाओं में केंद्रीय कृष्ण विवर बहुत छोटे और मंद हैं, या कई ऐसे आकाशगंगाओं में मूलतः केंद्रीय कृष्ण विवर नहीं बने थे। विश्लेषण से स्पष्ट हुआ कि दोनों प्रभाव योगदान करते हैं — छोटे विवर अपेक्षाकृत कम गैस खींचते हैं और इसलिए X-रे में मंद होते हैं, पर केवल मंदता से पूरी कमी नहीं समझी जा सकती। इस परिणाम से यह संकेत मिलता है कि बड़े कृष्ण विवर सीधे विशाल गैस बादलों के पतन से बन सकते हैं, न कि केवल छोटे विवर के धीरे-धीरे बढ़ने से। भविष्य में Laser Interferometer Space Antenna (एक संयुक्त NASA और European Space Agency मिशन) जैसी दूरगामी जाँच 2035 के लिए नियोजित है, पर बड़े मिशनों के लिए अनिश्चित वित्तपोषण आगे के परीक्षणों को प्रभावित कर सकता है।

कठिन शब्द

  • कृष्ण विवरबहुत भारी और घना गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र
  • अल्ट्रा-द्रव्यमानअत्यधिक बड़ा द्रव्यमान वाला वस्तु या विवर
  • द्रव्यमानकिसी वस्तु में उपस्थित पदार्थ की मात्रा
  • विश्लेषणआंकड़ों या जानकारी का गहन अध्ययन और व्याख्या
  • उत्सर्जितऊर्जा या विकिरण बाहर निकालना
  • मंदताकम चमक या काम करने की ताकत की कमी
  • पतनगुरुत्वाकर्षण के कारण किसी पदार्थ का ढीला होकर ढह जाना

युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।

चर्चा के प्रश्न

  • यदि कई छोटी आकाशगंगाओं में केंद्रीय कृष्ण विवर नहीं बने थे तो यह ब्रह्मांड के विकास के बारे में क्या संकेत देता है? अपने विचार बताइए।
  • छोटे विवर की मंदता और कुछ में विवर न बने होने—दोनों कारणों के मिश्रण से खगोलशास्त्र में अगला अनुसंधान किस प्रकार प्रभावित हो सकता है? उदाहरण दें।
  • Laser Interferometer Space Antenna जैसे मिशनों के अनिश्चित वित्तपोषण से भविष्य के परीक्षणों और खोजों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है? अपने तर्क बताइए।

संबंधित लेख

JWST ने कॉस्मिक वेब का नया मानचित्र बनाया (स्तर B2)
14 मई 2026

JWST ने कॉस्मिक वेब का नया मानचित्र बनाया

JWST के COSMOS-Web सर्वे से बना नया मानचित्र कॉस्मिक वेब को पहले से अधिक विस्तार से दिखाता है। यह मानचित्र ब्रह्मांड के उन समयों तक जाता है जब यह बहुत युवा था।

नोवा विस्फोटों की सीधे तस्वीरें (स्तर B2)
6 दिस॰ 2025

नोवा विस्फोटों की सीधे तस्वीरें

वैज्ञानिकों ने विस्फोट के कुछ ही दिनों में दो नोवा की सीधे तस्वीरें लीं। तस्वीरों से पता चला कि पदार्थ कई अलग प्रवाहों में निकला और यह उच्च-ऊर्जा गामा किरणों से जुड़ा था।

क्षयीमान डार्क मैटर और शुरुआती बड़े ब्लैक होल (स्तर B2)
17 अप्रैल 2026

क्षयीमान डार्क मैटर और शुरुआती बड़े ब्लैक होल

एक शोध दिखाता है कि डार्क मैटर के क्षय से शुरुआती आकाशगंगाओं की रसायनशास्त्र बदल सकती है और कुछ गैस सीधे ब्लैक होल में ढह सकती है। यह विचार Journal of Cosmology and Astroparticle Physics में प्रकाशित हुआ।

नया अध्ययन: 'मिनी नेप्च्यून' ग्रहों पर ठोस सतह संभव (स्तर B2)
2 दिस॰ 2025

नया अध्ययन: 'मिनी नेप्च्यून' ग्रहों पर ठोस सतह संभव

यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो की टीम ने मिनी नेप्च्यून ग्रहों की सतहों का पुन: परीक्षण किया। James Webb के डेटा से पता चला कि भारी वायुमंडल सतह पर दबाव बढ़ाकर पिघला चट्टान ठोस कर सकता है।

भारत ने सूर्य का नया जांच यान भेजा (स्तर B2)
5 सित॰ 2023

भारत ने सूर्य का नया जांच यान भेजा

चंद्र मिशन के कुछ दिन बाद भारत ने Aditya-L1 नाम का सौर जांच यान 2 सितंबर को भेजा। वैज्ञानिकों ने तकनीकी सफलता की प्रशंसा की, पर कुछ ने सार्वजनिक विज्ञान वित्तपोषण पर सवाल उठाए।