ETH Zurich, Friedrich Miescher Institute (Basel) और Cantonal Hospital of Lucerne के बीच सहयोग में शोधकर्ताओं ने मानव कान उपास्थि का इंजीनियर्ड संस्करण बनाया। टीम ने मानव कान की उपास्थि की कोशिकाओं का उपयोग कर यांत्रिक गुणों में प्राकृतिक ऊतक के समान संरचना तैयार की।
प्रयोगों में यह संरचना पशु मॉडल में छह सप्ताह बाद भी आकार और लोच रखती पाई गई। वर्तमान में बाहरी कान की पुनर्निर्माण की पारंपरिक विधि में मरीज की पसली की उपास्थि इस्तेमाल होती है, जो दर्द और शरीर पर निशान कर सकती है; इस नए तरीके से यह समस्या कम हो सकती है।
शुरुआत छोटे उपास्थि के अवशेषों से हुई और कोशिकाओं का विस्तार पोषक द्रावक में किया गया। टीम ने पोषक और ऑक्सीजन पहुँचाने वाला कल्चर माहौल विकसित किया और growth factors का परीक्षण कर कोशिकाओं के फाइब्रोब्लास्ट बनकर फाइब्रोकार्टिलेज देने को रोका। प्री-परिपक्वता लगभग नौ सप्ताह रही, उसके बाद प्रत्यारोपण किया गया। प्रयोग समय-गहन हैं और प्रत्येक में तीन से चार महीने लगते हैं।
लेखक Philipp Fisch ने बताया कि इलास्टिन अभी पूरी तरह परिपक्व नहीं है और आगे स्थिरीकरण की जरूरत है। अगले कदम क्लिनिकल अध्ययन, संरचित परीक्षण और मरीजों में उपयोग से पहले औपचारिक मंजूरी हैं।
कठिन शब्द
- उपास्थि — कान में मिलने वाला लचीला ऊतक
- कोशिका — शरीर की सबसे छोटी जीवित इकाईकोशिकाओं
- लोच — किसी चीज़ का वापस आकार लेने की क्षमता
- पुनर्निर्माण — खोया हिस्सा या अंग फिर बनाना
- पोषक द्रावक — कोशिकाओं के विकास के लिए उपयोगी द्रव
- परिपक्वता — कोशिकाओं या ऊतक का पूरा विकसित होनाप्री-परिपक्वता
- प्रत्यारोपण — एक ऊतक या अंग शरीर में लगाना
- स्थिरीकरण — किसी संरचना को स्थिर और टिकाऊ बनाना
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चर्चा के प्रश्न
- यह नया तरीका मरीजों के लिए दर्द और निशान कम करके किस तरह मदद कर सकता है? बताइए।
- क्लिनिकल अध्ययन और औपचारिक मंजूरी से पहले किन बातों की जाँच सबसे ज़रूरी होगी? तीन-चार वाक्यों में बताइए।
- यदि इलास्टिन पूरी तरह परिपक्व नहीं है, तो भविष्य में इस सामग्री में क्या सुधार आवश्यक हो सकते हैं? अपना विचार दीजिए।