जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय की एक टीम ने पाया कि कुछ व्यवहार अचानक आदत में बदल सकते हैं। यह निष्कर्ष Nature Communications में प्रकाशित अध्ययन से आया। वरिष्ठ लेखक Kishore V. Kuchibhotla ने कहा कि सदियों से वैज्ञानिक मानते आए हैं कि आदतें धीरे-धीरे अभ्यास से बनती हैं।
पारंपरिक अध्ययनों में पुरस्कार और एक विशेष परीक्षण समय उपयोग किए जाते थे। शोधकर्ता जानवरों को पुरस्कार से प्रशिक्षण देते हैं और फिर उन्हें इन पुरस्कारों तक मुक्त पहुँच देते हैं; यदि जानवर तृप्त होने के बाद भी वही काम करते रहे तो वह व्यवहार आदत माना जाता है। ऐसे परीक्षण वास्तविक समय में बदलाव दर्ज नहीं करते, इसलिए बदलाव को धीरे माना गया।
नई विधि में टीम ने स्वाद‑आधारित प्रेरणा इस्तेमाल की: घर के पिंजरे में एसिडिक पानी और ध्वनि‑संकेत पर पसंदीदा पेय। कई चूहों ने एक निश्चित क्षण पर रणनीति बदलकर ध्वनि पर भरोसेमंद प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया। मस्तिष्क रिकॉर्डिंग ने उस क्षेत्र की ओर संकेत किया जो संभवतः इस स्विच का काम कर सकता है। NIH ने इस संभावित नियंत्रक के अध्ययन के लिए टीम को नया अनुदान दिया।
कठिन शब्द
- निष्कर्ष — किसी अध्ययन का मुख्य या अंतिम परिणाम
- आदत — किसी काम को बार-बार करने की प्रवृत्तिआदतें
- पारंपरिक — पहले से अपनाया हुआ सामान्य तरीका
- तृप्त — जब भूख या इच्छा पूरी हो जाए
- विधि — किसी काम को करने का व्यवस्थित तरीका
- प्रेरणा — किसी क्रिया के लिए प्रेरित करने वाली वजह
- रणनीति — किसी लक्ष्य को पाने का सोचा हुआ तरीका
- अनुदान — किसी परियोजना के लिए दिया गया आर्थिक सहायता
- मस्तिष्क — शरीर का वह हिस्सा जो सोच और नियंत्रण करता है
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- क्या आपको लगता है कि मनुष्यों में भी कुछ व्यवहार अचानक आदत बन सकते हैं? अपने विचार एक- दो वाक्य में बताइए।
- स्वाद-आधारित प्रेरणा का प्रयोग करने के क्या फायदे या सीमाएँ हो सकती हैं? लिखिए।
- नए अनुदान का टीम की आगे की खोजों पर क्या असर हो सकता है? संक्षेप में बताइए।
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