कई बार लोग बिना सोचे-समझे दैनिक कार्य करते हैं, जैसे गाड़ी चलाना या कोई वस्तु हटाना। उन्नीसवीं सदी में मनोवैज्ञानिक विलियम जेम्स का तर्क था कि किसी गति के बाद ही मस्तिष्क में जागरूकता पैदा होती है। इसके विपरीत, विल्हेम वुंट का मानना था कि जागरूकता गति से पहले, योजना बनाते समय ही शुरू हो जाती है। उचित तकनीक न होने के कारण यह विवाद 130 से अधिक वर्षों तक नहीं सुलझ सका।
हाल ही में येल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं हाल ब्लुमेनफेल्ड और डेविड एस. जिन ने इस रहस्य को सुलझाया है। उन्होंने 67 प्रतिभागियों पर एक पहेली खेल के माध्यम से परीक्षण किया और EEG तकनीक से उनके मस्तिष्क की गतिविधि मापी। अध्ययन से स्पष्ट हुआ कि जेम्स और वुंट दोनों सही थे। पूर्ण जागरूकता के लिए क्रिया से पहले का 'प्री-मूवमेंट पॉजिटीविटी' संकेत और क्रिया के बाद का 'N140' संवेदी संकेत, दोनों आवश्यक हैं।
इसके अलावा, शोधकर्ताओं ने पाया कि जब प्रतिभागी थक जाते हैं, तो उनकी पुतलियाँ सिकुड़ जाती हैं और जागरूकता घट जाती है। पार्किंसंस, सिज़ोफ्रेनिया या स्ट्रोक के मरीजों में ये संकेत बाधित हो जाते हैं, जिससे उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ता है। भविष्य में शोधकर्ता fMRI तकनीक का उपयोग करके मस्तिष्क के गहरे हिस्सों का अध्ययन करेंगे।
कठिन शब्द
- जागरूकता — किसी बात का ज्ञान या होश होना।
- विवाद — दो पक्षों के बीच की असहमति या बहस।
- प्रतिभागी — किसी प्रतियोगिता या अध्ययन में भाग लेने वाला।
- रहस्य — ऐसी बात जो गुप्त या अनसुलझी हो।
- बाधित — जिसमें रुकावट या बाधा पैदा हो गई हो।
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चर्चा के प्रश्न
- क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि अत्यधिक थकान के समय आपकी एकाग्रता पर कैसा प्रभाव पड़ता है?
- मस्तिष्क के इन संकेतों को समझने से बीमार लोगों की मदद किस प्रकार की जा सकती है?
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