मानव साइटोमेगालोवायरस (HCMV) आम है और अक्सर बिना लक्षण रहता है, लेकिन संवेदनशील समूहों में यह गंभीर समस्या बन सकता है। फिलहाल वैक्सीन नहीं है और उपलब्ध एंटीवायरल दवाओं में विषाक्त दुष्प्रभाव और दवा-प्रतिरोध का खतरा है। यह वायरस शरीर के तरल पदार्थों से फैलता है और जीवनभर शरीर में बना रह सकता है।
टेक्सास विश्वविद्यालय ऑस्टिन की टीम ने एंटीबॉडी की संरचना बदलकर इंजीनियर की हुई एंटीबॉडी विकसित कीं। ये एंटीबॉडी वायरस के उन प्रोटीनों से जुड़ने से रोकती हैं जिन्हें वायरल Fc रिसेप्टर (vFcγRs) कहा जाता है। इसलिए वायरस अब एंटीबॉडी को "अपहरण" नहीं कर पाता और प्रतिरक्षा कोशिकाएँ सक्रिय रह सकती हैं।
प्रयोगशाला प्रयोगों में इन एंटीबॉडी ने कोशिकाओं के बीच वायरस के प्रसार को रोका और संक्रमित कोशिका कल्चर में वायरल फैलाव महत्वपूर्ण रूप से घटा। शोधकर्ता कहते हैं कि यह तकनीक अन्य हरपीसवायरस और कुछ बैक्टीरियल संक्रमणों पर भी लागू हो सकती है, पर क्लिनिकल उपयोग से पहले और परीक्षण आवश्यक हैं।
कठिन शब्द
- वैक्सीन — बीमारियों से बचाने वाली दवा या टीका
- एंटीवायरल — वायरस से लड़ने में प्रयोग होने वाली दवा
- दुष्प्रभाव — दवा या इलाज से होने वाला हानिकारक असर
- प्रतिरक्षा — शरीर की बीमारी से लड़ने की क्षमता
- एंटीबॉडी — शरीर का वह प्रोटीन जो रोगों से लड़ता है
- रिसेप्टर — किसी अणु से जुड़ने वाली कोशिका या प्रोटीन की जगह
- प्रसार — एक जगह से दूसरी जगह फैलना या फैलाव
- संक्रमित — जिसमें रोगजनक मौजूद या फैला हुआ हो
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- यदि ऐसी एंटीबॉडी सफलता से काम करें तो आपकी सोच में यह किस तरह से संवेदनशील मरीजों की मदद कर सकती हैं? उदाहरण दें।
- लेख कहता है कि वायरस जीवनभर शरीर में बना रह सकता है — इसका रोज़मर्रा की देखभाल पर क्या असर हो सकता है? अपने विचार बताइए।
- क्या आप सोचते हैं कि ऐसी तकनीकें अन्य संक्रमणों के लिए भी अच्छी विकल्प बन सकती हैं? क्यों या क्यों नहीं?
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