शोध टीम ने एक नया भौतिक-आधारित तरीका विकसित किया है जिसे NMR eigenmodes फ्रेमवर्क कहा गया है। यह तरीका आणविक स्तर पर होने वाली गति को उन संकेतों से जोड़ता है जिन्हें क्लिनिकल MRI मशीनें मापती हैं।
कंट्रास्ट एजेंटों में अक्सर गैडोलिनियम आयन होता है जो पानी के अणुओं के चुंबकीय प्रतिक्रिया को बदलता है। इस बदलने की प्रक्रिया को रिलैक्सेशन कहा जाता है। पुरानी सरल मॉडलों में कुछ मान्यताएँ थीं और वे असल व्यवहार की सटीक भविष्यवाणी में सीमित थे।
नई पद्धति Fokker-Planck समीकरण से समय के साथ बदलती संभावनाओं को ट्रैक करती है और प्रयोगों की तुलना में बेहतर मिलती-जुलती नतिज़े देती है। टीम ने अपना कोड ओपन सोर्स जारी किया है।
कठिन शब्द
- मॉडल — किसी चीज़ का एक प्रतिनिधित्व या नमूना।नया
- अणु — किसी पदार्थ की सबसे छोटी इकाई।अणुओं, पानी, के
- इंटरेक्शन — दो या अधिक चीज़ों का आपस में असर।और
- गतियों — किसी चीज़ के चलने या हिलने की क्रिया।जटिल, को
- कंट्रास्ट — विभिन्न छवियों में अंतर दिखाने वाली सामग्री।एजेंट्स, के
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चर्चा के प्रश्न
- आपको क्या लगता है कि नया मॉडल क्यों महत्वपूर्ण है?
- इस मॉडल के उपयोग से और कौन-कौन से परिणाम मिल सकते हैं?
- अगर यह मॉडल नहीं होता, तो MRI के परिणाम कैसे होते?
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