शोध टीम ने फेज़ 2 नैदानिक परीक्षण में linvoseltamab का परीक्षण किया, जिसका नेतृत्व Sylvester Comprehensive Cancer Center ने किया। निष्कर्ष American Society of Hematology की बैठक में प्रस्तुत किए गए। परीक्षण में Sylvester और उसके सैटेलाइट साइट्स पर कुल 25 रोगियों को भर्ती किया गया था।
उनमें से 18 प्रतिभागियों ने linvoseltamab के साथ छह चक्र तक इलाज पूरा किया और इलाज के बाद अत्यधिक संवेदनशील बोन मैरो परीक्षणों में detectable रोग नहीं मिला। linvoseltamab एक बायस्पेसिफिक एंटीबॉडी है जो T कोशिकाओं पर CD3 और मायलोमा कोशिकाओं पर BCMA से जुड़ती है और इससे टी सेल ट्यूमर से सीधे जुड़ते हैं।
परीक्षण में कुछ मरीजों को न्यूट्रोपीनिया और ऊपरी श्वसन संक्रमण जैसे दुष्प्रभाव हुए, पर टीम ने सुरक्षा प्रोफ़ाइल को स्वीकार्य बताया। अध्ययन में साइटोकाइन रिलीज़ सिंड्रोम और न्यूरोटॉक्सिसिटी रोकने के उपाय लिए गए और ऐसी प्रतिक्रियाएँ रिपोर्ट नहीं हुईं। परिणामों के आधार पर भर्ती सीमा बढ़ाई जा रही है, लेकिन बड़े और लंबे अध्ययन अभी आवश्यक हैं।
कठिन शब्द
- नैदानिक परीक्षण — मरीजों पर नए इलाज की जांच करने की प्रक्रिया
- बायस्पेसिफिक — दो अलग लक्ष्य एक साथ जोड़ने वाला
- एंटीबॉडी — रोग से लड़ने वाले प्रोटीन
- बोन मैरो — हड्डी के अंदर खून बनाने वाली जगह
- दुष्प्रभाव — इलाज के बाद होने वाली हानिकारक प्रतिक्रिया
- सुरक्षा प्रोफ़ाइल — दवा के जोखिम और सुरक्षित उपयोग का सार
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चर्चा के प्रश्न
- यदि आप इस तरह के नैदानिक परीक्षण में प्रतिभागी बनें, तो आप कौन-सी बातें सोचकर निर्णय लेंगे? बताइए।
- लेख में लिखा है कि बड़े और लंबे अध्ययन अभी आवश्यक हैं। आपके हिसाब से क्यों बड़े अध्ययन जरूरी होते हैं?
- साइटोकाइन रिलीज़ सिंड्रोम और न्यूरोटॉक्सिसिटी रोकने के उपाय लिए गए और ऐसी प्रतिक्रियाएँ रिपोर्ट नहीं हुईं। यह सुरक्षा के बारे में आपको क्या बताता है?