एक फेज़ 2 क्लिनिकल परीक्षण में शोधकर्ताओं ने linvoseltamab नामक बायस्पेसिफिक एंटीबॉडी का परीक्षण किया। यह दवा T कोशिकाओं और मायलोमा कोशिकाओं को जोड़कर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया बढ़ाती है।
परीक्षण में कुल 25 रोगी शामिल थे और कुछ ने छह चक्र तक इलाज पूरा किया। इलाज के बाद ऐसे मरीजों के बोन मैरो में detectable रोग नहीं मिला। कुछ रोगियों में न्यूट्रोपीनिया और ऊपरी श्वसन संक्रमण जैसे दुष्प्रभाव हुए, लेकिन सुरक्षा को स्वीकार्य कहा गया। अब शोधकर्ता और प्रतिभागियों को शामिल करने की योजना बना रहे हैं ताकि परिणामों की पुष्टि हो सके।
कठिन शब्द
- क्लिनिकल परीक्षण — दवाओं को मरीजों पर आजमाने की प्रक्रिया
- बायस्पेसिफिक — दो अलग कोशिकाओं को जोड़ने वाला प्रकार
- प्रतिरक्षा — शरीर की बीमारी से लड़ने की क्षमता
- मायलोमा — हड्डी की मज्जा से जुड़ा कैंसर
- न्यूट्रोपीनिया — रक्त में कुछ सफेद कोशिकाओं की कमी
- ऊपरी श्वसन संक्रमण — नाक और गले का सामान्य संक्रमण
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चर्चा के प्रश्न
- क्या आप इस परीक्षण में भाग लेना चाहेंगे? क्यों या क्यों नहीं?
- शोधकर्ता आगे क्या करने की योजना बना रहे हैं?
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