कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, रिवरसाइड और यूसी इरवाइन के शोधकर्ताओं ने 2017 और 2023 के बीच किए गए 341 पिवोटल (प्रमुख) क्लिनिकल परीक्षणों की समीक्षा की। उनका निष्कर्ष है कि केवल 6% परीक्षण ही अमेरिका की नस्लीय और जातीय संरचना का प्रतिनिधित्व करते हैं।
विशेषकर काले और हिस्पैनिक व्यक्तियों की भागीदारी घटती गई और 2021 के बाद उनकी भर्ती और भी कम हुई। दूसरी ओर एशियाई प्रतिनिधित्व बढ़ा जबकि श्वेत भागीदारी अधिकांशतः स्थिर रही। शोध ने दिखाया कि कई बड़े परीक्षण ICH (International Council for Harmonisation) मानकों के अनुरूप कुछ ही क्षेत्रों में संचालित होते हैं, जिससे सबूत उन्हीं जगहों पर एकत्रित होते हैं।
लेख में यह भी कहा गया है कि उप-सहारा अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के बड़े हिस्सों में 3% से भी कम प्रमुख परीक्षण होते हैं, और ये अक्सर उन डेटा से बाहर रह जाते हैं जो अमेरिकी जनता के लिये दवाओं को आकार देते हैं। शोध ने प्रारम्भिक चरणों में अधिक विविधता अपनाने की सिफारिश की है।
कठिन शब्द
- क्लिनिकल परीक्षण — दवाओं या इलाज की जांच करने वाला औपचारिक अध्ययनक्लिनिकल परीक्षणों
- प्रतिनिधित्व — किसी समूह की वास्तविक उपस्थिति या भागीदारी
- भर्ती — किसे शामिल करने या नामांकन करने की प्रक्रिया
- मानक — किसी चीज़ के लिये तय किए गए नियम या स्तरमानकों
- सिफारिश — किसी उपाय या कार्रवाई का सुझाव देना
- प्रारम्भिक — किसी प्रक्रिया के आरम्भ या शुरुआती चरण से संबंधित
- विविधता — अलग-अलग प्रकार या समूहों की मौजूदगी
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चर्चा के प्रश्न
- आपके विचार में दवा परीक्षणों में विविध प्रतिनिधित्व क्यों जरूरी है?
- काले और हिस्पैनिक लोगों की भर्ती घटने के क्या कारण हो सकते हैं?
- यदि आप शोध टीम होते तो प्रारम्भिक चरणों में अधिक विविधता लाने के लिये क्या उपाय सुझाते?