एक नई समीक्षा कहती है कि कभी‑कभी की गई विलासिता अक्सर लंबे समय में वजन घटाने को खराब नहीं करती। समीक्षा में मनोवैज्ञानिक और शारीरिक प्रभावों दोनों को देखा गया।
यदि उच्च‑कैलोरी दिनों को योजना में रखा जाए तो कुछ लोगों को डाइट पर बने रहने में मदद मिलती है। पर अनियोजित या भावनात्मक खाने से अपराध‑बोध और अस्वस्थ खाने के पैटर्न बन सकते हैं। बड़े खाने का दीर्घकालिक शारीरिक असर सामान्यतः छोटा होता है।
समीक्षा चेतावनी देती है कि सामाजिक प्लेटफॉर्म पर दिखने वाले अत्यधिक खाने बिंज‑सदृश व्यवहार को सामान्य बना सकते हैं। लेखकों का कहना है कि खाने को योजनाबद्ध रूप से जगह देना बेहतर है और और शोध की जरूरत है।
कठिन शब्द
- समीक्षा — किसी विषय पर लिखा गया विश्लेषण या अध्ययन
- विलासिता — आराम और सुख के लिए खर्च या जीवनशैली
- मनोवैज्ञानिक — मन और व्यवहार से जुड़ा हुआ पहलू
- अनियोजित — पहले से योजना में न रखा हुआ
- अपराध‑बोध — कुछ गलत करने पर होने वाला दुख
- बिंज‑सदृश — अत्यधिक मात्रा में खाने जैसा व्यवहार
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- क्या आपने कभी योजना बनाकर अधिक कैलोरी वाला दिन रखा है? वह कैसे मदद या परेशानी बना?
- आपका क्या विचार है: सोशल मीडिया पर खाने की तस्वीरें लोगों के खाने के व्यवहार को कैसे प्रभावित कर सकती हैं?
- अगर कोई अनियोजित खाने के बाद अपराध‑बोध महसूस करे, तो आप क्या सलाह देंगे?
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