WHO और यूनिसेफ की रिपोर्ट बताती है कि लगभग एक अरब बच्चे और वयस्क, साथ ही बुजुर्ग, आवश्यक सहायक तकनीक तक पहुँच से वंचित हैं। रिपोर्ट का उद्देश्य यह दिखाना है कि कमी कहाँ सबसे बड़ी है और किस तरह से जरूरतें पूरी नहीं हो रही हैं।
कुछ निम्न और मध्यम आय वाले देशों में चश्मा, सुनने के यंत्र और चलने या संवाद के उपकरणों तक पहुंच बहुत कम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी 2.5 अरब लोगों को एक या अधिक सहायक उत्पादों की आवश्यकता है और 2050 तक यह संख्या 3.5 अरब से अधिक हो जाएगी। साथ ही लंबे सफर और ऊँचे खर्च जैसी व्यावहारिक बाधाएँ प्रमुख रोड़े हैं, और लगभग दो-तिहाई उपयोगकर्ताओं ने निजी खर्च से भुगतान बताया।
रिपोर्ट सरकारों, उद्योग और नागरिक समाज से इन उत्पादों के लिए धन उपलब्ध कराने और इन्हें सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज में शामिल करने का आग्रह करती है। रिपोर्ट उपयोगकर्ताओं को शामिल करने वाले अधिकार-आधारित दृष्टिकोण का समर्थन करती है।
कठिन शब्द
- वंचित — किसी जरूरी चीज़ न मिलने की स्थिति
- पहुँच — किसी सेवा या चीज़ तक जाने की क्षमता
- सहायक तकनीक — दैनिक कार्य में मदद करने वाले उपकरण या सिस्टम
- बाधा — किसी काम या प्रक्रिया में रुकावट करने वाली चीज़बाधाएँ
- निजी खर्च — व्यक्ति या परिवार द्वारा स्वयं किया गया भुगतान
- सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज — सबके लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुँच का सिस्टम
- अधिकार-आधारित दृष्टिकोण — मानव अधिकारों पर आधारित नीतियों और कार्रवाई का तरीका
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- क्या आपके इलाके में सहायक उपकरण जैसे चश्मा या सुनने के यंत्र आसानी से मिलते हैं? अपना अनुभव बताइए।
- सरकारें और उद्योग क्या कदम उठा सकते हैं ताकि सहायक तकनीक सस्ती और अधिक उपलब्ध हो सके?
- अधिकार-आधारित दृष्टिकोण अपनाने से उपयोगकर्ताओं को क्या फायदे हो सकते हैं? अपने विचार लिखिए।