शोधियों का मानना है कि सोशल मीडिया पोस्टों का त्वरित विश्लेषण संकट के समय जनसंख्या के आंदोलनों के शुरुआती संकेत दे सकता है और इससे मानवीय एजेंसियों को तेज़ी से प्रतिक्रिया करने में मदद मिल सकती है। यह काम EPJ Data Science में प्रकाशित हुआ और टीम ने X (पूर्व में Twitter) पर तीन भाषाओं में लगभग 2 million पोस्टों का परीक्षण किया।
अध्ययन में तीन केस स्टडी शामिल थीं: यूक्रेन, सूडान और वेनेज़ुएला। रिपोर्ट में कहा गया है कि जब सर्वे करना मुश्किल होता है, तब डिजिटल डेटा ऐसे संकेत दे सकते हैं जिन्हें पारंपरिक स्रोत आसानी से नहीं दे पाते। शोध ने यह भी नोट किया कि जबरन विस्थापन हाल के वर्षों में बढ़ा है और 2024 में हर 67 में से एक व्यक्ति ने अपना घर छोड़ा।
टीम ने पाया कि सेंटिमेंट लेबल (positive, negative, neutral) इमोशन लेबल की तुलना में सीमापार आंदोलनों के समय और मात्रा का बेहतर संकेत देते हैं। pretrained language models सबसे प्रभावी प्रारंभिक चेतावनी दे रहे थे, क्योंकि वे बड़े टेक्स्ट पर गहरे सीखने से प्रशिक्षित होते हैं।
शोध ने चेतावनी दी कि सोशल मीडिया विश्लेषण गलत अलार्म दे सकता है और यह पारंपरिक आर्थिक संकेतकों और क्षेत्रीय रिपोर्टों के साथ मिलाकर शुरुआती ट्रिगर के रूप में सबसे उपयोगी है। बाद में काम में स्वचालित अनुवाद और अन्य नेटवर्कों का जोड़ सुझाया गया था।
कठिन शब्द
- विश्लेषण — किसी चीज़ का गहराई से अध्ययन करना।विश्लेषण से
- संवेदनाएँ — अहसास या भावना जो मन में आती है।संवेदनाओं
- अलार्म — चेतावनी देने वाला संकेत।गलत अलार्म
- संकट — कठिन या गंभीर स्थिति।
- भविष्यवाणी — भविष्य में होने वाली चीज़ों का अनुमान लगाना।भविष्यवाणी करते
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- क्या आपको लगता है कि सोशल मीडिया का विश्लेषण भविष्य में और उपयोगी हो सकता है? क्यों?
- मौजूदा डेटा स्रोतों के साथ मिलकर विश्लेषण का क्या महत्व है?
- भावनाओं और संवेदनाओं के बीच संबंधों के शोध का क्या प्रभाव हो सकता है?
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