मिसौरी विश्वविद्यालय की एक टीम ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जरिए मेलेनोमा का जल्दी पता लगाने के तरीके पर अध्ययन किया। शोधकर्ता संदिग्ध त्वचा असामान्यताओं की छवियों का मूल्यांकन कर रहे हैं ताकि जिन मामलों में निकट चिकित्सा निगरानी चाहिए, उन्हें तुरंत पहचाना जा सके।
यह तकनीक डॉक्टरों का विकल्प बनकर नहीं बल्कि निर्णय-सहायता उपकरण के रूप में तैयार की गई है। शोध ने दिखाया कि जल्दी पहचान से इलाज पहले शुरू हो सकता है और इससे रोगियों के स्वास्थ्य परिणाम सुधर सकते हैं।
टीम ने 400,000 छवियों के डेटाबेस का उपयोग करके मॉडल प्रशिक्षित और परखा। उन्होंने तीन मौजूदा मॉडलों की तुलना की; व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक ने अधिकतम 88% सटीकता दिखाई और जब तीनों को जोड़ा गया तो सटीकता 92% से ऊपर चली गई।
कठिन शब्द
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता — मशीनें जो समझ कर निर्णय ले सकें
- मेलेनोमा — त्वचा का एक खतरनाक कैंसर
- निर्णय-सहायता उपकरण — डॉक्टर के फैसले में मदद करने वाला साधन
- निगरानी — किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य पर नजर रखना
- सटीकता — परिणामों की सही होने की मात्रा
- प्रशिक्षित करना — मशीन या मॉडल को सिखानाप्रशिक्षित
- छवि — किसी चीज़ का दृश्य या तस्वीरछवियों
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- यदि यह तकनीक जल्दी पहचान कर दे तो आपके हिसाब से मरीजों के लिए क्या फायदे होंगे? बताइए।
- लेख कहता है कि यह उपकरण डॉक्टरों का विकल्प नहीं है। क्या आप इससे सहमत हैं? अपने कारण लिखिए।
- इस तरह के मॉडल को विकसित करने और अस्पतालों में लागू करने में कौन‑सी चुनौतियाँ हो सकती हैं?