Washington University in St. Louis और Tsinghua University के शोधकर्ताओं ने दिखाया कि ऊतकों में फाइब्रोसिस अक्सर धीरे-धीले बढ़ने के बजाय अचानक कदमों में आगे बढ़ता है। उन्होंने यह परिणाम Proceedings of the National Academy of Sciences में प्रकाशित किया।
टीम ने संगणकीय मॉडलिंग से एक यांत्रिक "टिपिंग प्वाइंट" पाया जो कोशिकाओं के समन्वय को नियंत्रित करता है। जब कोशिकाएँ कुछ सौ माइक्रोमीटर के भीतर आती हैं, तो वे यांत्रिक रूप से संवाद करना शुरू कर देती हैं और ऊतक संकुचित व कठोर हो जाता है।
कोलेजन फाइबर का संरेखण और खिंचाव टेंशन बैंड बनाते हैं जो यांत्रिक संकेत लंबी दूरी तक पहुँचाते हैं। शोध में "न्यूनतम खिंचाव अनुपात" नामक गुण बताया गया है और कहा गया है कि क्रॉसलिंकिंग इस गुण को प्रभावित करती है। लेखक तीन संभावित हस्तक्षेप सुझाते हैं और कहते हैं कि केवल ऊतक को नरम करना अक्सर पर्याप्त नहीं रहता।
कठिन शब्द
- फाइब्रोसिस — ऊतक में घनी या कठोर बनना
- टिपिंग प्वाइंट — किसी प्रणाली में अचानक बदलने का बिंदु
- संगणकीय — कंप्यूटर से किया गया या संबंधित
- समन्वय — कई हिस्सों का साथ काम करना
- कोलेजन — ऊतक में पाया जाने वाला एक प्रोटीन
- क्रॉसलिंकिंग — फाइबरों के बीच बंध बनाने की प्रक्रिया
- खिंचाव — किसी चीज़ का खिंच जाना या खींचना
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चर्चा के प्रश्न
- यदि कोई डॉक्टर टिपिंग प्वाइंट को पहचान सके तो यह फाइब्रोसिस के इलाज में कैसे मदद कर सकता है?
- आपके विचार में क्रॉसलिंकिंग फाइबरों के व्यवहार को क्यों बदल सकती है? दो-तीन वाक्य में बताइए।
- क्या आपकी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में किसी ऐसी स्थिति का अनुभव है जहाँ छोटे बदलाव से बड़ा असर हुआ हो? एक उदाहरण दीजिए।