Journal of Experimental Psychology: General में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने दिखाया कि उम्र बढ़ने के साथ शून्य-योग मान्यताएँ घटती हैं। शोध टीम ने World Values Survey के बड़े अंतरराष्ट्रीय डेटा से यह पैटर्न शुरू में देखा और फिर चार प्रयोग करके इसकी पुष्टि की। प्रयोगों में कुल लगभग 2,500 प्रतिभागियों को दो आयु समूहों में बाँटा गया: युवा और वृद्ध, और उन्हें सामान्य बयानों पर सहमति नापने के साथ-साथ कार्यस्थल और पुरस्कारों से जुड़े विशिष्ट परिदृश्यों का आकलन करवाया गया।
परिणामों से स्पष्ट हुआ कि वृद्ध वयस्क उन परिदृश्यों को शून्य-योग के रूप में देखने की संभावना कम रखते थे जबकि युवा अधिकतर मामलों को जीत-हार की प्रतियोगिता मानते थे। शोध ने यह भी नोट किया कि यह रुझान पीढ़ियों के पार कायम रहता है: आज के युवा पहले के समूहों की तुलना में अधिक शून्य-योग मानते हैं।
लेखकों ने चेतावनी दी कि गैर-प्रतिस्पर्धी परिस्थितियों को प्रतिस्पर्धी मान लेना खतरनाक हो सकता है; उदाहरण के लिए प्रवासियों को अक्सर नौकरियाँ छीनने वाला दिखाया जाता है जबकि सबूत बताते हैं कि वे कई बार नौकरियाँ जोड़ते हैं और अर्थव्यवस्था का विस्तार करते हैं। शोधकर्ता सुझाते हैं कि इस पूर्वाग्रह को उजागर करने और अनुभव बढ़ाने से बेहतर निर्णय और सहयोग-आधारित नतीजे मिल सकते हैं, जैसा कि negotiation पाठ्यक्रम के छात्रों के व्यवहार में देखा गया।
कठिन शब्द
- शून्य-योग — एक विश्वास कि किसी का लाभ दूसरें के नुकसान से आता है
- मान्यता — किसी बात को सच या सही मानने की धारणामान्यताएँ
- रुझान — किसी दिशा में बार-बार दिखने वाली प्रवृत्ति
- पीढ़ी — एक समय में जन्मे लोगों का समूहपीढ़ियों
- पूर्वाग्रह — अन्यायपूर्वक नकारात्मक या एकतरफ़ा सोच
- प्रतिस्पर्धी — किसी जीत के लिए दूसरों से मुकाबला करने वालागैर-प्रतिस्पर्धी
- आकलन — मूल्य या परिणाम का माप और मूल्यांकन करना
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चर्चा के प्रश्न
- कार्यस्थल में शून्य-योग मान्यताओं के बढ़ने या घटने का कर्मचारियों और नियोक्ताओं पर क्या प्रभाव पड़ सकता है? उदाहरण के साथ बताइए।
- समाज में इस तरह के पूर्वाग्रह को कम करने के लिए कौन से व्यावहारिक कदम उठाए जा सकते हैं? आप किस तरह के अनुभव या प्रशिक्षण सुझाएंगे?
- पीढ़ियों के बीच शून्य-योग मान्यताओं में फर्क आने का क्या कारण हो सकता है और यह भविष्य में सामाजिक नीतियों को कैसे प्रभावित कर सकता है?