एक नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने जापानी राइस फिश (मेडाका) का उपयोग कर प्रजनन स्वास्थ्य पर पोटेशियम पर्क्लोरेट के प्रभावों का परीक्षण किया। अध्ययन का नेतृत्व रामजी भंडारी ने किया, जो University of Missouri में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। शोधकर्ताओं ने मेडाका इसलिए चुना क्योंकि उनकी प्रजनन जीन और प्रक्रियाएँ मनुष्यों से मिलती-जुलती हैं।
परीक्षण में नर मछलियों को पोटेशियम पर्क्लोरेट के संपर्क में रखा गया और उनकी प्रजनन क्षमता में नाटकीय गिरावट तथा अंडकोष की स्पष्ट क्षति देखी गई। एक दूसरे समूह को समान समय पर विटामिन C भी दिया गया; इस समूह में बेहतर प्रजनन और कम आंतरिक क्षति देखी गई।
शोध बताते हैं कि पोटेशियम पर्क्लोरेट ऑक्सीडेटिव तनाव पैदा करता है जो शुक्राणु उत्पादन से जुड़े जीन और मार्गों में बाधा डालता है। विटामिन C एक शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट के रूप में उन मार्गों को बहाल कर सकता है और शुक्राणु स्वास्थ्य की रक्षा कर सकता है। परिणाम विशेष रूप से सैन्य, औद्योगिक या पर्यावरणीय परिस्थितियों में काम करने वाले लोगों के लिए प्रासंगिक हो सकते हैं, लेकिन मानव स्वास्थ्य पर किए जाने वाले आगे के अध्ययन जरूरी हैं। यह शोध Environmental Science and Technology में प्रकाशित हुआ।
कठिन शब्द
- प्रजनन — नए जीव बनाने की जैविक प्रक्रियाप्रजनन क्षमता
- पोटेशियम पर्क्लोरेट — एक रासायनिक पदार्थ, प्रयोगों में उपयोग किया जाता है
- ऑक्सीडेटिव तनाव — कोशिका में हानिकारक ऑक्सिडेशन होने की स्थिति
- शुक्राणु — नर शरीर में उत्पन्न होने वाली प्रजनन कोशिकाएँशुक्राणु उत्पादन
- एंटीऑक्सिडेंट — ऐसा पदार्थ जो ऑक्सीडेशन रोकता और संरक्षण करता है
- अंडकोष — नर प्राणियों का वह अंग जहाँ प्रजनन कोशिकाएँ बनती हैंअंडकोष की
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चर्चा के प्रश्न
- क्या आपको लगता है कि मछलियों पर मिले परिणाम सीधे मनुष्यों पर लागू हो सकते हैं? क्यों या क्यों नहीं?
- यदि कोई व्यक्ति जोखिम वाली औद्योगिक स्थिति में काम करता हो, तो आप विटामिन C के उपयोग के बारे में क्या सोचते हैं? अपने कारण लिखिए।
- आपके ख्याल से किन पेशों या परिस्थितियों में ऐसे रसायन का संपर्क सबसे अधिक जोखिम भरा होगा? उदाहरण दें।