एक नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने समझाया है कि कुछ ओवरी कैंसर कोशिकाएँ किस तरह कीमोथेरेपी के दौरान जीवित रह कर बाद में प्रतिरोधी बन जाती हैं। अध्ययन ने खासकर cisplatin पर ध्यान दिया, जो मानक कीमोथेरेपी दवाओं में से एक है।
शोध ने दिखाया कि cisplatin DNA को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ कोशिका के भीतर माइक्रोट्यूब्यूल्स को भी बाधित कर सकती है। कोशिकाएँ अपने आंतरिक ढाँचे में बदलाव कर के अनुकूलन कर लेती हैं। केंद्र में tubulin polymerization promoting protein 3 है, जिसे संक्षेप में TPPP3 कहा जाता है। जिन कोशिकाओं में TPPP3 का स्तर अधिक था वे माइक्रोट्यूब्यूल्स को स्थिर कर पाती थीं और cisplatin या carboplatin के प्रभावों का प्रतिरोध कर रही थीं।
प्रयोगशाला मॉडल में TPPP3 हटाने से कोशिकाओं की cisplatin के प्रति संवेदनशीलता लौट आई। शोधकर्ता अब TPPP3 को लक्षित करने वाली दवाओं और इसे बायोमार्कर के रूप में जांचने की योजना बना रहे हैं, ताकि मौजूदा उपचारों में सुधार किया जा सके।
कठिन शब्द
- कीमोथेरेपी — कैंसर के लिए दी जाने वाली दवा प्रक्रिया
- प्रतिरोधी — जिस पर दवा का असर कम या नहीं होता
- माइक्रोट्यूब्यूल्स — कोशिका के भीतर लंबी तंतु जैसी संरचना
- अनुकूलन — परिवर्तन कर के किसी स्थिति में ढलना
- बायोमार्कर — बीमारी या उपचार का संकेत देने वाला संकेतक
- संवेदनशीलता — किसी दवा या शर्त के प्रति प्रतिक्रिया का स्तर
- TPPP3 — एक प्रोटीन जो माइक्रोट्यूब्यूल्स को स्थिर करता
- cisplatin — मानक कीमोथेरेपी दवा, DNA को नुकसान पहुँचाती
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चर्चा के प्रश्न
- TPPP3 को लक्षित करने वाली दवाएँ होने पर कैंसर उपचार पर क्या असर हो सकता है?
- आप किस तरह जांचेंगे कि किसी रोगी में TPPP3 बायोमार्कर के रूप में उपयोगी है या नहीं?
- कीमोथेरेपी के दौरान कोशिकाओं का अनुकूलन होना मरीजों के इलाज के लिए क्यों चिंता का विषय है?