नए शोध से पता चला कि धूम्रपान फेफड़ों की कुछ कोशिकाओं को बदल देता है। 2011 के एक अध्ययन ने भी दिखाया था कि मध्य आयु में भारी धूम्रपान से डिमेंशिया का जोखिम बाद में बढ़ सकता है।
शोध में बताया गया कि निकोटीन PNECs नामक कोशिकाएँ सक्रिय कर देती है। ये कोशिकाएँ एक्सोसोम नाम के छोटे कण छोड़ती हैं। ये कण लोहा नियंत्रक प्रोटीन लेकर दिमाग के कोशिकाओं में बदलाव कर सकते हैं। टीम अब जान रही है कि क्या इन कणों को रोकने से इलाज संभव होगा।
कठिन शब्द
- कोशिका — जीव के छोटे संरचनात्मक और कार्यात्मक भागकोशिकाओं, कोशिकाएँ
- एक्सोसोम — कोशिकाओं से निकले छोटे गोले या कण
- निकोटीन — तम्बाकू में पाया जाने वाला सक्रिय रसायन
- जोखिम — किसी नकारात्मक घटना के होने की संभावना
- इलाज — बीमारी या समस्या का उपचार या उपाय
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चर्चा के प्रश्न
- अगर आपको पता चले कि धूम्रपान डिमेंशिया का जोखिम बढ़ा सकता है, तो आप क्या फैसला लेंगे?
- आपको क्या लगता है — शोधकर्ता कणों को रोकने की कोशिश क्यों कर रहे हैं?
- क्या आपने अपने परिवार या दोस्तों में किसी को धूम्रपान करते देखा है? उनका व्यवहार बदलने के लिए आप क्या सुझाव देंगे?
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