एक अंतरराष्ट्रीय शोध में वैज्ञानिकों ने दिखाया कि बड़े-काल के जलवायु परिवर्तन कार्निवोरन के शरीर रूपों को आकार देने में महत्वपूर्ण रहे। इस समूह में भालू, भेड़िये, सील, बिल्लियाँ और कुत्ते शामिल हैं। अध्ययन में यह भी पाया गया कि आधुनिक बिल्लियों व कुत्तों के पूर्वज मैंगूस-सदृश थे, जिनका शरीर लंबा और कान छोटे तथा गोल थे।
शोध का नेतृत्व क्रिस लॉ ने किया और उनकी टीम ने 17 प्राकृतिक इतिहास संग्रहालयों के 850 से अधिक कार्निवोरन नमूनों की कंकाल आकृतियों का मापन किया। नमूने कुल मिलाकर लगभग 200 प्रजातियों को कवर करते थे: 118 वर्तमान और 81 लुप्तप्राय या विलुप्त प्रजातियाँ।
डेटा ने दिखाया कि करीब 34 मिलियन साल पहले Eocene–Oligocene संक्रमण परिवारों के बीच बड़े बदलावों से जुड़ा था, जबकि करीब 15–13 मिलियन साल पहले का Mid‑Miocene संक्रमण परिवारों के भीतर परिवर्तन से जुड़ा। लेख Proceedings of the Royal Society B में प्रकाशित हुआ और लेखकों ने कहा कि ये संक्रमण शरीर विविधता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
कठिन शब्द
- अंतरराष्ट्रीय — दो या अधिक देशों से जुड़ा काम
- शोध — नया ज्ञान खोजने की व्यवस्थित प्रक्रिया
- कार्निवोरन — मांस-खाने वाले स्तनधारियों का एक समूह
- कंकाल — जानवर या इंसान की हड्डियों की संरचना
- लुप्तप्राय — ऐसी प्रजाति जो लगभग नष्ट हो रही हो
- संक्रमण — एक अवस्था से दूसरी अवस्था में बदलाव
- विविधता — किसी समूह में अलग-अलग प्रकार होना
- प्रजाति — एक तरह के जीवों का समूहप्रजातियाँ
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चर्चा के प्रश्न
- आपके विचार में बड़े-काल के जलवायु परिवर्तन ने कार्निवोरन के शरीर रूप बदलने के लिये कौन से दो कारण दिए होंगे? संक्षेप में बताइए।
- क्या आज की तेज जलवायु बदलती परिस्थितियों से प्रजातियों की विविधता पर असर पड़ेगा? अपना अनुमान लिखिए और एक कारण दें।
- प्राकृतिक इतिहास संग्रहालयों में रखे कंकालों का अध्ययन करने से और कौन सी जानकारी मिल सकती है? दो-तीन वाक्यों में बताइए।