शोधकर्ताओं ने University of Chicago Pritzker School of Molecular Engineering और Abdus Salam International Centre for Theoretical Physics (ICTP) के सहयोग से क्वांटम सिमुलेशन का उपयोग कर यह अध्ययन किया कि पराबैंगनी प्रकाश बर्फ की रसायनशास्त्र को कैसे बदलता है। इनके नतीजे Proceedings of the National Academy of Sciences में प्रकाशित हुए।
टीम ने चार प्रकार की बर्फ के मॉडल बनाए और दिखाया कि दोष बर्फ के प्रकाश अवशोषण व उत्सर्जन को बदल देते हैं। हाइड्रॉक्साइड आयनों की उपस्थिति UV अवशोषण की शुरुआत को शिफ्ट कर देती है, जबकि Bjerrum दोष और भी बड़े परिवर्तन पैदा करते हैं।
मॉलेक्युलर स्तर पर UV प्रकाश पानी अणुओं को तोड़कर हाइड्रोनियम आयन, हाइड्रॉक्सिल रेडिकल और मुक्त इलेक्ट्रॉन बना सकता है। दोषों के अनुसार इलेक्ट्रॉन बर्फ में फैल सकते हैं या छोटे गुहाओं में फँस सकते हैं। टीम अब प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर अपने पूर्वानुमानों का परीक्षण कर रही है और जटिल मॉडल बनाने की योजना बना रही है।
कठिन शब्द
- क्वांटम सिमुलेशन — क्वांटम नियमों से बनी संगणकीय नकल
- पराबैंगनी प्रकाश — दृष्टि से दिखाई न देने वाला उच्च ऊर्जा प्रकाश
- दोष — किसी ठोस में संरचनात्मक गलती या कमी
- अवशोषण — किसी पदार्थ द्वारा ऊर्जा या प्रकाश लेनाप्रकाश अवशोषण, UV अवशोषण
- उत्सर्जन — किसी पदार्थ से ऊर्जा या प्रकाश निकलना
- हाइड्रॉक्साइड आयन — एक नकारात्मक चार्ज वाला रासायनिक आयनहाइड्रॉक्साइड आयनों
- हाइड्रोनियम आयन — पानी के साथ बना सकारात्मक चार्ज वाला आयन
- मुक्त इलेक्ट्रॉन — किसी परमाणु से अलग स्वतंत्र रूप से चलने वाला इलेक्ट्रॉन
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चर्चा के प्रश्न
- बर्फ के अवशोषण और उत्सर्जन बदलने से स्थानीय वातावरण पर क्या प्रभाव हो सकते हैं?
- प्रयोगशाला परीक्षण टीम के मॉडल और पूर्वानुमानों को कैसे बेहतर बना सकते हैं?
- क्या आपको लगता है कि यह शोध रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकता है? क्यों या क्यों नहीं?