येल स्कूल ऑफ मेडिसिन के एक नए अध्ययन के अनुसार निश्चेतना के दौरान मस्तिष्क की गतिविधि केवल नींद जैसी नहीं रहती। यह शोध Proceedings of the National Academy of Sciences में प्रकाशित हुआ। शोध का नेतृत्व सहायक प्रोफेसर Janna Helfrich ने किया।
टीम ने प्रोपोफॉल से सेडेट रोगियों पर फुल‑हेड 20 इलेक्ट्रोड वाले EEG से मस्तिष्क की रिकॉर्डिंग की। वे इन रिकॉर्डिंग्स की तुलना गहरी नींद, REM नींद, कोमा और जाग्रत अवस्था से कर रहे थे।
परिणामों से पता चला कि निश्चेतित मस्तिष्क कई अलग अवस्थाओं में जा सकता है; कुछ पैटर्न नींद से मिलते हैं और कुछ कोमा से मिलते हैं। शोध-सुझाव यह है कि चिकित्सकों को खुराक मरीज के अनुसार समायोजित करनी चाहिए ताकि कोमा-सदृश अवस्थाएँ टाली जा सकें और संभव हो तो अधिक नींद-सदृश स्थिति को बढ़ावा दिया जा सके।
कठिन शब्द
- निश्चेतना — शल्यकर्म या प्रक्रिया में चेतना का न होना
- मस्तिष्क — शरीर का वह अंग जो सोच और नियंत्रित करता है
- गतिविधि — किसी अंग या प्रणाली का करना या काम करना
- रिकॉर्डिंग — ध्वनि या संकेतों को लिखने की क्रिया या प्रक्रियारिकॉर्डिंग्स
- तुलना — दो या अधिक चीजों को मिलाकर देखना और परखना
- कोमा — गंभीर और दीर्घकालिक बेहोशी की स्थिति
- खुराक — दवा देने के लिए निर्धारित मात्रा या पैमाना
- समायोजित — किसी चीज़ को आवश्यक अनुसार बदलना या ढालना
- सदृश — किसी अन्य चीज़ के जैसा दिखना या होना
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- आप किस कारण से सोचते हैं कि खुराक मरीज के अनुसार समायोजित करनी चाहिए? संक्षेप में बताइए।
- यदि निश्चेतना के दौरान मस्तिष्क को नींद-सदृश स्थिति बढ़ाने की कोशिश की जाए तो इससे क्या फायदे या जोखिम हो सकते हैं? दो-तीन वाक्यों में लिखिए।
- आपके अनुसार अस्पतालों में EEG जैसी रिकॉर्डिंग सुविधा होना मरीजों के लिए कैसे मददगार हो सकता है?