एक नए अध्ययन में दिखाया गया है कि ट्यूमर की चयापचय स्थिति दवाओं की प्रभावशीलता को बदल सकती है। अध्ययन का मुख्य विषय PRMT5 है, जो जीनों को नियंत्रित करने वाला एक प्रोटीन है और दवा लक्ष्य रहा है। सामान्य कोशिकाओं में PRMT5 SAM नामक अणु के साथ काम करता है, लेकिन MTAP जीन के उत्परिवर्तन या विलोपन के कारण करीब 10 से 15 प्रतिशत कैंसरों में यह MTA से जुड़ता है।
शोधकर्ताओं ने Promega की NanoBRET Target Engagement तकनीक पर आधारित बायोसेंसर तरीका अपनाया। Oxford की टीम ने CBH-002 नामक एक कोशिका-प्रवेशी BRET प्रोब डिजाइन किया, जो PRMT5-NanoLuc बायोसेंसर से जुड़कर जीवित कोशिकाओं में दवा‑लक्ष्य जुड़न दिखाता है।
परिणामों से पता चला कि MTA स्तर दवा चयनशीलता को प्रभावित करते हैं और कुछ अवरोधक MTAP‑विलोपित कैंसरों में बेहतर काम करते हैं। यह उपकरण अलग चयापचय परिस्थितियों में अवरोधकों के अलग व्यवहार को समझने में मदद करता है।
कठिन शब्द
- चयापचय — कोशिकाओं में ऊर्जा और रसायन क्रियाएँ
- प्रभावशीलता — किसी दवा का काम करने की क्षमता
- उत्परिवर्तन — डीएनए में स्थायी परिवर्तन होना
- विलोपन — जीन या भाग का हट जाना
- बायोसेंसर — जैविक संकेत पता करने वाला उपकरण
- कोशिका-प्रवेशी — कोशिका के अंदर प्रवेश करने वाला
- अवरोधक — किसी क्रिया या प्रोटीन को रोकने वाली दवा
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चर्चा के प्रश्न
- यदि किसी कैंसर में MTAP जीन विलोपित है, तो यह दवा के चयन पर कैसे असर डाल सकता है?
- बायोसेंसर विधि का उपयोग शोध और इलाज दोनों में कैसे मदद कर सकता है?