एट्रियल फिब्रिलेशन (A‑fib) एक सामान्य अनियमित हृदय लय है और इसके नए उपचार हाल के दशकों में रोगियों तक पूरी तरह नहीं पहुँच पाए। शोधकर्ता बताते हैं कि इसकी एक वजह यह थी कि मानव हृदय के सटीक मॉडल उपलब्ध नहीं थे जिनमें रोग‑प्रक्रियाएँ और दवाओं का परीक्षण किया जा सके।
मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी की एक टीम ने 2020 में मानव हृदय‑जैसे कार्यशील ऑर्गानोइड विकसित किए, जो छोटे तीन‑आयामी ऊतक हैं और स्वाभाविक रूप से धड़कते हैं। इनमें कक्ष जैसे ढांचे और रक्त वाहिकाओं का नेटवर्क होता है। इन ऑर्गानोइड को दान की गई तृणमूल कोशिकाओं से बनाया गया।
टीम ने ऑर्गानोइड में दीर्घकालिक innate प्रतिरक्षा कोशिकाएँ, जैसे मैक्रोफेज, जोड़ीं और दिखाया कि ये कोशिकाएँ हृदय विकास और लय को मार्गदर्शित करती हैं। शोधकर्त्यों ने सूजन प्रेरित कर के A‑fib जैसी अनियमित धड़कन पैदा की; फिर एंटी‑इन्फ्लेमेटरी दवा देने पर रिदम आंशिक रूप से सामान्य हुआ। यह मॉडल अब दवाओं और जैव‑तकनीक साझेदारों के साथ स्क्रीनिंग के काम में आ रहा है।
कठिन शब्द
- एट्रियल फिब्रिलेशन — हृदय की सामान्य धड़कन का अनियमित होना
- ऑर्गानोइड — छोटे तीन‑आयामी हृदय जैसे ऊतक
- तृणमूल कोशिका — ऐसी कोशिका जो कई कोशिकाओं बनाती हैतृणमूल कोशिकाओं
- मैक्रोफेज — रोगों से लड़ने वाली प्रतिरक्षा कोशिका
- सूजन — शरीर की प्रतिक्रिया जिससे लालिमा या दर्द होता है
- स्क्रीनिंग — दवाओं या उपचारों की जांच करने की प्रक्रिया
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चर्चा के प्रश्न
- क्या आपको लगता है कि ऑर्गानोइड दवाओं के परीक्षण में मदद करेंगे? क्यों?
- तृणमूल कोशिकाओं के दान के बारे में आपका क्या विचार है?
- सूजन कम करने वाली दवाओं का हृदय रोगों में क्या महत्व हो सकता है? संक्षेप में बताइए।
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