एट्रियल फिब्रिलेशन (A‑fib) दुनिया भर में व्यापक है और लंबे समय से नए उपचारों के रोगियों तक पहुँचने में बाधाएँ रहीं क्योंकि शोधकर्ताओं के पास मानवीय हृदय ऊतक के सटीक, प्रयोगात्मक मॉडल नहीं थे। मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इसी क्षेत्र में एक कदम बढ़ाते हुए कार्यशील मानव हृदय‑जैसे ऑर्गानोइड विकसित किए, जिनका आरम्भ 2020 में Aitor Aguirre की टीम के तहत हुआ।
ये तीन‑आयामी ऑर्गानोइड मसूर के दाने जितने छोटे होते हैं, स्वाभाविक रूप से धड़कते हैं और इनमें कक्ष जैसे ढांचे तथा रक्त वाहिका नेटवर्क मौजूद हैं। टीम ने दान की गई तृणमूल कोशिकाओं से ऑर्गानोइड बनाए और Colin O'Hern जैसे शोधकर्ताओं ने इनमें प्रतिरक्षा कोशिकाएँ (जैसे मैक्रोफेज) जोड़ीं, जो मानव विकासशील दिलों में सही वृद्धि सुनिश्चित करती हैं।
शोधकर्त्यों ने ऑर्गानोइड में सूजन पैदा कर के A‑fib जैसी अनियमित धड़कन ट्रिगर की और दर्शाया कि एंटी‑इन्फ्लेमेटरी दवा देने से लय आंशिक रूप से सुधरी। उन्होंने एक ऐसी उम्र बढ़ाने की प्रणाली भी विकसित की जो ऑर्गानोइड को वयस्क‑हृदय जैसा बनाकर A‑fib की ओर ले जा सकती है। समूह अब फार्मा और बायोटेक साझेदारों के साथ यौगिकों की स्क्रीनिंग कर रहा है।
यह काम MSU और Washington University के योगदानकर्ताओं ने मिलकर किया और National Institutes of Health, National Science Foundation, Corewell Health तथा अन्य फाउंडेशन और संघों के समर्थन से हुआ। Aguirre की दूरदर्शिता में रोगी कोशिकाओं पर आधारित व्यक्तिगत हृदय मॉडल और भविष्य में प्रत्यारोपण के लिये तैयार हृदय ऊतक बनाना शामिल है।
कठिन शब्द
- एट्रियल फिब्रिलेशन — हृदय की अनियमित और तेज धड़कन की स्थिति
- ऑर्गानोइड — छोटा, प्रयोगशाला में बना अंग जैसा ऊतकऑर्गानोइड में
- तृणमूल कोशिका — वो कोशिकाएँ जो अन्य कोशिकाएँ बनाती हैंतृणमूल कोशिकाओं
- प्रतिरक्षा कोशिका — रोग और संक्रमण से लड़ने वाली कोशिकाएँप्रतिरक्षा कोशिकाएँ
- सूजन — शरीर या ऊतक में सूजन या जलन की प्रक्रिया
- एंटी‑इन्फ्लेमेटरी दवा — सोजन को कम करने वाली दवा
- प्रत्यारोपण — एक शरीर से दूसरे में ऊतक लगाना
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चर्चा के प्रश्न
- यह मानव‑हृदय ऑर्गानोइड विकसित होने से रोगियों के लिए क्या फायदे हो सकते हैं? कारण बताइए।
- ऑर्गानोइड में सूजन बनाकर बीमारी मॉडल बनाने के नैतिक या व्यावहारिक जोखिम क्या हो सकते हैं? अपने विचार दें।
- फार्मा और बायोटेक साझेदारों के साथ यौगिकों की स्क्रीनिंग का रोगी‑केंद्रित अनुसंधान पर क्या असर होगा? उदाहरण दें।