नए प्रयोगशाला शोध में शोधकर्ताओं ने दीर्घकालिक अंतरारित हाइपोक्सिया का उपयोग कर ऐसा चूहा मॉडल तैयार किया जो मानव अनचिकित्सित स्लीप एप्निया में होने वाली ऑक्सीजन में आवर्ती गिरावट को दोहराता है। चूहों को उनके सामान्य नींद व्यवहार के अनुरूप उन घंटों के दौरान हाइपोक्सिया के संपर्क में रखा गया और उनकी पूरी उम्र भर सेहत का पालन किया गया।
तुलनात्मक समूहों में, जो चूहे सामान्य ऑक्सीजन पर रहे, उनसे अलग दीर्घकालिक इंटरमिटेंट हाइपोक्सिया वाले चूहों में मृत्यु दर काफी अधिक पाई गई और हृदय-वाहिकीय त्वरित बुढ़ापे के स्पष्ट संकेत मिले। प्रमुख परिवर्तनों में रक्तचाप में वृद्धि, हृदय की कार्यक्षमता में कमी, नसों की लचक में कमी, कोरोनरी फ्लो रिज़र्व में कमी और हृदय की विद्युत सक्रियता में असामान्यताएँ शामिल थीं।
- अंतराहित हाइपोक्सिया का संचयी शारीरिक तनाव
- हृदय-वाहिकीय संरचना और कार्य में परिवर्तन
- दीर्घकालिक मृत्यु जोखिम में वृद्धि
University of Missouri के Mohammad Badran ने कहा कि यह संचयी बोझ जैविक उम्र को तेज करता है और मृत्यु जोखिम बढ़ा देता है। Marshall University के David Gozal ने बताया कि यह मॉडल जीवन भर के प्रभावों को अन्य जटिलताओं के बिना दिखाने की अनुमति देता है। शोधकर्ता प्रारंभिक स्क्रीनिंग और हस्तक्षेप—जैसे CPAP थेरेपी और अन्य विकल्प—को बेहतर दीर्घकालिक हृदय-वाहिकीय परिणामों के उपाय के रूप में सुझाते हैं। यह अध्ययन npj Aging में प्रकाशित हुआ है और University of Missouri द्वारा रिपोर्ट किया गया है।
कठिन शब्द
- हाइपोक्सिया — शरीर में ऑक्सीजन की कमी की स्थिति
- दीर्घकालिक — लंबे समय तक जारी रहने वाली अवस्था
- अनचिकित्सित — जिसे चिकित्सा से इलाज न मिला हुआ
- इंटरमिटेंट — बार-बार रुक-रुक कर होने वाली कमी
- हृदय-वाहिकीय — दिल और रक्त नलिकाओं से संबंधित
- संचयी — धीरे-धीरे जमा होकर बढ़ने वाला बोझ
- कोरोनरी फ्लो रिज़र्व — हृदय को अतिरिक्त रक्त देने की क्षमता
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चर्चा के प्रश्न
- यह चूहा मॉडल मानव स्लीप एप्निया के दीर्घकालिक प्रभाव समझने में कैसे मदद कर सकता है? उदाहरण दें।
- CPAP थेरेपी जैसे हस्तक्षेपों के फायदे और सीमाएँ क्या हो सकती हैं, खासकर हृदय-वाहिकीय परिणामों के दृष्टिकोण से?
- इस अध्ययन के आधार पर आप स्वास्थ्य नीतियों में कौन से कदम सुझाएँगे ताकि अनचिकित्सित स्लीप एप्निया के जोखिम कम हों?
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