भारत ने घरेलू आपूर्ति की रक्षा और बढ़ती कीमतें शांत करने के मकसद से गैर‑बासमती सफेद चावल पर निर्यात पाबंदी लगाई। सरकार ने यह कदम जुलाई में लिया और अगस्त में बासमती पर 20 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी जोड़ा ताकि गैरकानूनी छिपे हुए निर्यात रोके जा सकें। अभी पाबंदी हटाने की कोई तिथि तय नहीं की गई है; कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि यह अगले वर्ष मई तक रह सकती है क्योंकि सामान्य चुनाव हैं, जबकि अधिकारी ऐसे समय‑सीमाओं को काल्पनिक कहते हैं।
अर्थशास्त्री David Dawe ने कहा कि पाबंदी से आत्मनिर्भरता पर जोर बढ़ेगा और देशों को किसान प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए कृषि अनुसंधान में निवेश करना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के Jauhar Ali के अनुसार संकर चावल उपज में लगभग 30 प्रतिशत वृद्धि कर सकते हैं, लेकिन इसे अपनाने के लिए सिंचाई, अनुसंधान और विस्तार सेवाएं, पोस्ट‑हार्वेस्ट सुविधाएं और जैविक उर्वरक में निवेश आवश्यक है।
चीनी शोधकर्ताओं ने हाल ही में एक बड़े संकर चावल की घोषणा की जिसकी उपज 12 मैट्रिक टन प्रति हेक्टेयर बनाम 9 मैट्रिक टन बताई गई है और यह शोध युआन लोंगपिंग के काम से जुड़ा है। फिलीपींस में PhilRice की Flordeliza Bordey ने कहा कि राष्ट्रीय चावल कार्यक्रम के तहत सरकार सिंचित जमीन के लिए संकर बीज और उर्वरक उपलब्ध कराएगी और डिजिटल उपकरणों से जलवायु अनुकूलन लागू करेगी।
कठिन शब्द
- निर्यात पाबंदी — किसी वस्तु को दूसरे देश भेजने पर रोक
- आत्मनिर्भरता — देश की अपनी जरूरतें खुद पूरा करने की क्षमता
- संकर चावल — भिन्न चावल किस्मों के मिलकर बनी फसल
- उपज — खेती से प्राप्त अनाज की मात्रा
- सिंचाई — खेतों में पानी देने की व्यवस्था
- जैविक उर्वरक — प्राकृतिक पदार्थ जो मिट्टी में पोषण देते हैं
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- निर्यात पाबंदी घरेलू बाजार की कीमतों और किसानों पर क्या असर डाल सकती है? अपने विचार संक्षेप में लिखें।
- संकर चावल के लिए सिंचाई और अनुसंधान में निवेश करने से किस तरह के लाभ हो सकते हैं? एक-दो वाक्य में बताइए।
- डिजिटल उपकरणों से जलवायु अनुकूलन लागू करने पर किसानों को किस तरह मदद मिल सकती है? उदाहरण दे कर समझाइए।