नई अध्ययन यह बताती है कि मानव ठोड़ी सीधे अनुकूलन नहीं है बल्कि विकास का उपोत्पाद हो सकती है। ठोड़ी केवल Homo sapiens में देखी गई है और न ही चिंपैंजी, नियोथल या डेनिसोवन्स में मिली है, इसलिए यह हमारे जीवाश्म अभिलेखों में विशेषता के रूप में उपयोगी हो सकती है।
शोध Noreen von Cramon-Taubadel के नेतृत्व में University at Buffalo की टीम ने PLOS One में प्रकाशित किया। उन्होंने ठोड़ी को निचली जबड़े की हड्डी का उभार बताया और इसे शरीर के व्यापक संदर्भ में रखा ताकि पता चले कि यह प्रत्यक्ष चयन से है या किसी उपोत्पाद से।
टीम ने तटस्थता की शून्य परिकल्पना का परीक्षण करने हेतु वानरों और मनुष्यों के खोपड़ी गुणों की तुलना की। उन्होंने पाया कि खोपड़ी के कुछ हिस्सों पर प्रत्यक्ष चयन के संकेत हैं, पर ठोड़ी के लिए spandrel मॉडल बेहतर बैठता है। लेखक कहते हैं कि यह अनुकूलनवादी प्रवृत्ति को चुनौती देता है और गुणों के एकीकरण पर ध्यान देना जरूरी बताता है।
कठिन शब्द
- उपोत्पाद — किसी विकास या प्रक्रिया का नतीजा
- विशेषता — किसी चीज़ का पहचानने योग्य गुण या चिन्ह
- जीवाश्म — प्राचीन पौधों या जानवरों के बचे हुए अवशेष
- उभार — हड्डी या सतह पर सूजा हुआ उठान
- परिकल्पना — किसी बात को परखने के लिए बनाया गया अनुमान
- एकीकरण — विभिन्न हिस्सों का मिलकर एक रूप बनना
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चर्चा के प्रश्न
- अगर मानव ठोड़ी वास्तव में उपोत्पाद है तो जीवाश्म अभिलेखों में इसका क्या महत्त्व हो सकता है?
- क्या आपके ख्याल में कोई और मानव गुण है जो अनुकूलन नहीं बल्कि उपोत्पाद हो सकता है? क्यों?
- यह शोध अनुकूलनवादी व्याख्या को चुनौती देता है — आप इस निष्कर्ष से क्या सीखते हैं?