शोध में टीम ने यह आश्रय दिया कि जीवनकाल में रक्तप्रवाह से हड्डी के सूक्ष्म अन्तरालों में पहुंचे मेटाबोलाइट्स समय के साथ संरक्षित रह सकते हैं। इस विचार को परखने के लिए उन्होंने मास स्पेक्ट्रोमेट्री से अणुओं को आयनों में बदलकर पहचान की। पहले आधुनिक चूहे की हड्डियों के विश्लेषण में लगभग 2,200 मेटाबोलाइट्स मिले और वही विधि प्राचीन नमूनों पर लागू की गई। कुछ नमूनों ने कॉलाजन जैसे प्रोटीन भी पकड़े।
टीम ने तंजानिया, मलावी और दक्षिण अफ्रीका की पैलियॉन्टोलॉजिकल संग्रहों से 1.3 से 3 मिलियन वर्ष पुराने जीवाश्म हड्डियों के टुकड़े जांचे। ये नमूने कई कृंतक, एक एंटीलोप, एक सूअर और एक हाथी जैसी प्रजातियों से संबंधित थे। विश्लेषण ने हजारों मेटाबोलाइट्स प्रदर्शित किए, जिनमें आधुनिक जानवरों के साथ साझा अणु भी थे।
मेटाबोलाइट्स ने अमीनो एसिड, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और खनिजों के चयापचयों के निशान दिखाए। Olduvai Gorge के 1.8 मिलियन वर्ष पुराने ग्राउंड स्क्विरल में Trypanosoma brucei परजीवी से जुड़ा एक अनोखा मेटाबोलाइट और विरोधी-प्रज्वलन संकेत मिले, जो संक्रमण के अनुरूप हैं। पौधों के मेटाबोलाइट्स (जिनमें एलो और एस्पैरैगस प्रकार शामिल थे) ने आहार और स्थानीय तापमान, वर्षा, मिट्टी तथा वृक्ष आवरण के पुनर्निर्माण में मदद की।
लेखकों का सुझाव है कि जीवाश्मों पर मेटाबोलोमिक्स प्रागैतिहासिक पर्यावरणों के बारे में सूक्ष्म पारिस्थितिक जानकारी दे सकता है। अतिरिक्त सह-लेखक फ्रांस, जर्मनी, कनाडा और अमेरिका की संस्थानों से हैं। शोध को The Leakey Foundation ने समर्थन दिया और National Institutes of Health ने अतिरिक्त तकनीकी सहायता प्रदान की।
कठिन शब्द
- मेटाबोलाइट — जीवों में बनने वाले छोटे रासायनिक अणुमेटाबोलाइट्स
- मास स्पेक्ट्रोमेट्री — मौलिकों को आयनों में बदल कर पहचानने की विधि
- कॉलाजन — हड्डियों और ऊतकों में पाया जाने वाला प्रोटीन
- परजीवी — दूसरे जीव पर निर्भर रहने वाला सूक्ष्मजीव
- प्रागैतिहासिक — लिखित दस्तावेज़ों से पहले का पुराना काल
- पुनर्निर्माण — बीते पर्यावरण या घटना का फिर से अनुमान
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चर्चा के प्रश्न
- इस शोध के आधार पर आप कैसे समझेंगे कि प्रागैतिहासिक जानवरों का आहार और स्थानिक पर्यावरण कैसा था? उदाहरण दें।
- जीवाश्मों में मेटाबोलाइट्स की पहचान में कौन-कौन सी सीमाएँ या आशंकाएँ हो सकती हैं? आप किन सबूतों से इन समस्याओं को कम कर सकते हैं?
- जैविक और भौतिक संग्रहों में रखे प्राचीन नमूनों का उपयोग भविष्य के वैज्ञानिक सवालों के उत्तर के लिए कैसे महत्वपूर्ण बनता है?