The Rockefeller University के शोधकर्ताओं ने cryo-EM से T सेल रिसेप्टर (TCR) को एक जैवरासायनिक, झिल्ली-समान वातावरण में इमेज किया। यह काम Laboratory of Molecular Electron Microscopy के नेतृत्व में हुआ और Nature Communications में प्रकाशित किया गया।
टीम ने दो मुख्य बदलाव किए: मल्टी-प्रोटीन कॉम्प्लेक्स को नैनोडिस्क में वापस रखा और ऐसे लिपिड चुने जो T सेल झिल्ली से मेल खाते हैं। इन नैनोडिस्क में प्रोटीनों को सही तरह से एकत्र करना चुनौतीपूर्ण था और टीम ने कई घटकों को संतुलित किया, जिनमें कई प्रोटीन शामिल थे।
अध्ययन से पता चला कि आराम की स्थिति में रिसेप्टर एक बंद, संकुचित अवस्था में रहता है और एंटिजन से मिलने पर यह खुलकर अचानक सक्रिय हो जाता है। यह समझ यह स्पष्ट कर सकती है कि कुछ मरीज मौजूदा प्रतिरक्षा उपचारों से लाभ क्यों नहीं पाते और शोध भविष्य में इन उपचारों को परिष्कृत करने में मदद कर सकता है।
कठिन शब्द
- जैवरासायनिक — जीव और रसायन से जुड़ा हुआ माहौल
- झिल्ली — कोशिका के बाहर पतली परत या परदाझिल्ली-समान
- नैनोडिस्क — छोटी कृत्रिम झिल्ली जैसी संरचना
- लिपिड — कोशिकाओं में पाए जाने वाले वसा-आधारित अणु
- संकुचित — छोटी या तंग हुई स्थिति
- प्रतिरक्षा — शरीर की बीमारी से लड़ने की क्षमता
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चर्चा के प्रश्न
- रिसेप्टर का आराम की स्थिति में संकुचित रहना और एंटिजन पर अचानक सक्रिय होना मरीजों के इलाज को कैसे प्रभावित कर सकता है? समझाइए।
- नैनोडिस्क और उपयुक्त लिपिड का चुनाव इस तरह के प्रयोगों में क्यों महत्वपूर्ण लगता है? आप अपने शब्दों में बताइए।