Virginia Tech के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन प्रकाशित किया कि सोशल मीडिया फीड अक्सर सामान्य जीवन की बजाय असामान्य और रोमांचक घटनाएँ क्यों दिखाते हैं। इस अध्ययन में नया विचार प्रस्तुत किया गया है जिसे उन्होंने "दुर्लभता पूर्वाग्रह प्रसार" कहा।
अध्ययन का नेतृत्व Alice Jang और Viswanath Venkatesh ने किया। शोध में पाया गया कि लोग रोमांच की ओर स्वाभाविक रूप से आकर्षित होते हैं और यदि वे दुर्लभ सामग्री बार-बार देखते हैं तो वे उसकी सामान्यता को ओवरएस्टिमेट कर लेते हैं। इससे वे खुद भी ऐसी सामग्री साझा करने लगते हैं, जो फिर और फैलती है।
टीम ने साझा करने के निर्णय जानने के लिए छह प्रयोग किए और एक नकली नेटवर्क भी बनाया जिसमें हजारों उपयोगकर्ता और अनूठी सामग्री थी। परिणाम बताते हैं कि यह विकृति केवल एल्गोरिद्म की वजह नहीं है; मानवीय पूर्वाग्रह और विविधता की चाह प्लेटफॉर्म की गतिशीलता के साथ मिलकर दुर्लभ जानकारी को बढ़ाती है।
कठिन शब्द
- दुर्लभता — किसी घटना या चीज़ का कम होना, दुर्लभ होना
- पूर्वाग्रह — निष्पक्ष न होकर किसी तरह का झुकाव या सोच
- प्रसार — किसी सूचना या चीज़ का फैलकर अधिक लोगों तक पहुँचना
- विकृति — सामान्य या सही रूप से हटकर बदल जाना या बिगड़ जाना
- नकली नेटवर्क — बनाया हुआ नेटवर्क जिसमें असली नहीं दिखने वाले अकाउंट हों
- एल्गोरिद्म — किसी काम को करने का नियमों या चरणों वाला तरीका
- विविधता — एक साथ कई अलग किस्मों या विकल्पों की मौजूदगी
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- क्या आपने कभी किसी असामान्य पोस्ट को बार-बार देखकर उसे सामान्य समझ लिया है? अपना अनुभव बताइए।
- आपका क्या ख्याल है — सोशल मीडिया पर दुर्लभ चीजें फैलने में उपयोगकर्ता की चाह या प्लेटफॉर्म का नियम ज्यादा जिम्मेदार है? क्यों?
- नकली नेटवर्क और विविधता दोनों का मिलना जानकारी के प्रसार पर कैसे असर कर सकता है? अपने विचार सरल शब्दों में बताइए।