शोधकर्ता ने पाया कि लोग नकली खबरों को अलग तरह से पढ़ते हैं। कई बार लोग इन्हें मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि जानकारी या भावना से जुड़ा महसूस करके साझा करते हैं।
टीम ने COP मॉडल बनाया, जिसमें तीन चीजें देखी जाती हैं: सत्यता, भावनात्मक अपील और प्रासंगिकता। उन्होंने सोशल मीडिया के हजारों ट्वीट्स का विश्लेषण किया और लाइक्स तथा नकारात्मक टिप्पणियों के अनुपात को मापा। परिणामों से पता चला कि भावनात्मक टोन खासकर नकारात्मक भावनाएँ लोगों को तेज़ प्रतिक्रिया देने पर प्रेरित करती हैं।
कठिन शब्द
- नकली खबर — झूठी या बनायी हुई जानकारीनकली खबरों
- शोधकर्ता — किसी विषय पर खोज करने वाला व्यक्ति
- भावनात्मक — भावनाओं से जुड़ा हुआ गुण या असर
- प्रासंगिकता — किसी बात का सम्बन्ध या उपयोगिता
- विश्लेषण — किसी जानकारी को ध्यान से जाँचना और समझना
- नकारात्मक — बुरा अर्थ या विरोध दर्शाने वालानकारात्मक टिप्पणियों, नकारात्मक भावनाएँ
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- क्या आप कभी ऐसे पोस्ट साझा करते हैं जो बहुत भावनात्मक हों? क्यों या क्यों नहीं?
- आप कैसे पहचानेंगे कि कोई खबर सच है या नकली?
- अगर सोशल मीडिया पर किसी पोस्ट में नकारात्मक टोन हो और लोग तेज़ प्रतिक्रिया दे रहे हों तो आप क्या करेंगे?
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