अध्ययन में शोधकर्ताओं ने यह जांचने की कोशिश की कि लोग नकली खबरों को टैब्लॉइड कहानियों की तरह ही पढ़ते हैं या नहीं। उन्होंने पाया कि टैब्लॉइड अक्सर मनोरंजन के लिए पढ़े जाते हैं, जबकि नकली खबरें इसलिए स्वीकार और साझा की जाती हैं क्योंकि वे भावनात्मक या जानकारी के रूप में उपयोगी लगती हैं।
टीम ने COP (Content Dimensions–Overton Window–Perceived Utility) मॉडल विकसित किया। मॉडल तीन मुख्य कारकों पर ध्यान देता है: सत्यता, भावनात्मक अपील और प्रासंगिकता। साथ ही उन्होंने Overton विंडो की भूमिका भी बतायी कि कौन से विचार सार्वजनिक रूप से स्वीकार्य हैं।
शोध के लिए उन्होंने COVID-19 से जुड़ी 10,000 से अधिक ट्वीट्स का विश्लेषण किया, लाइक्स और "ratioed" पोस्ट्स को मापा, और सेंटिमेंट विश्लेषण से टोन नापा। परिणामों में भय, गुस्सा और घृणा जैसी नकारात्मक भावनाओं का प्रभाव खासतौर पर मजबूत दिखा।
कठिन शब्द
- सत्यता — किसी बात या सूचना का सही होना
- भावनात्मक — भावना से जुड़ा या भावनाओं वाला
- प्रासंगिकता — किसी चीज का वर्तमान विषय से संबंध होना
- नकली — असली न होकर बनावट या झूठा
- साझा करना — किसी चीज को दूसरे लोगों के साथ बाँटनासाझा
- विश्लेषण — किसी विषय के हिस्सों को समझना या जांचना
- सेंटिमेंट — लेख या संदेश में व्यक्त भावना या रुख
युक्ति: जब आप किसी भी भाषा में कहानी पढ़ें या ऑडियो सुनें, तो लेख में हाइलाइट किए गए शब्दों पर होवर/फ़ोकस/टैप करें और तुरंत छोटी-सी परिभाषा देखें।
चर्चा के प्रश्न
- क्या आप कभी बिना जांचे कोई खबर स्वीकार या साझा कर चुके हैं? क्यों?
- यह अध्ययन बताता है कि भावनात्मक सामग्री प्रभावी है। आप सोचते हैं कि यह सोशल मीडिया पर खबरों की विश्वसनीयता कैसे बदलता है?
- Overton विंडो के बारे में आप क्या सोचते हैं — कौन से विचार आम तौर पर सार्वजनिक रूप से स्वीकार्य होते हैं?